‘केस रद्द करने की शक्ति का इस्तेमाल सोच-समझकर करें हाईकोर्ट’

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
Follow us on Google News
share

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालयों को मुकदमा रद्द करने की शक्ति का प्रयोग सोच-समझकर ही करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट प्राथमिकी रद्द करने की मांग पर सुनवाई दौरान मिनी ट्रायल नहीं कर सकता। कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा रद्द की गई 6 प्राथमिकी को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया।

‘केस रद्द करने की शक्ति का इस्तेमाल सोच-समझकर करें हाईकोर्ट’

सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि उच्च न्यायालयों को मुकदमा रद्द करने की अपनी शक्ति का बहुत ही सोच-समझकर और कभी-कभार ही करना चाहिए। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट प्राथमिकता रद्द करने की मांग पर विचार करते समय मुकदमे का मिनी ट्रायल नहीं कर सकते। जस्टिस संजय करोल और एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की अपील पर यह फैसला दिया। हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोपों में कर्नाटक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर दर्ज 6 प्राथमिकी रद्द कर दी थी। पीठ ने कहा कि यह तय कानून द्वारा स्थापित सिद्धांत है कि उच्च न्यायालयों को दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की शक्ति का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। जस्टिस करोल ने फैसले में कहा गया कि जब कोई हाईकोर्ट प्राथमिकता रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा हो, तो उसे जांच से जुड़ी सामग्री के बारे में गैर-जरूरी छानबीन करने से बचना चाहिए। फैसले में कहा गया कि हाईकोर्ट को बस यह देखना होता है कि क्या पहली नजर में प्राथमिकी के तथ्यों से किसी संज्ञेय अपराध का पता चलता है या नहीं। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्राथमिकता रद्द करने की मांग के शुरुआती चरण में ही हाईकोर्ट द्वारा ‘मुकदमे का मिनी-ट्रायल’ नहीं किया जा सकता है。

हाईकोर्ट ने दायरे से बाहर जाकर काम किया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने आदेशों में सीआरपीसी की धारा-482 के तहत याचिका पर विचार करने के दायरे से बाहर जाकर काम किया। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में दो अहम बातों पर ध्यान दिया था, पहला प्राथमिकता दर्ज करने में देरी और दूसरा पैसे की मांग या वसूली का कोई सबूत न होना। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गैर-कानूनी तरीके से पैसे या फायदे की मांग और उसकी वसूली का सबूत न होना, बरी होने का तो आधार बन सकता है लेकिन, यह प्राथमिकता रद्द करने का आधार नहीं हो सकता। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा छह प्राथमिकता रद्द करने का फैसला रद्द कर दिया।

यह है मामला

कर्नाटक पुलिस ने वर्ष 2020 में बेंगलुरु की सेंट्रल क्राइम ब्रांच के सहायक पुलिस आयुक्त प्रभु शंकर और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण रोकथाम अधिनियम (पीसी एक्ट) एवं अन्य धाराओं में 6 प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद, आरोपी पुलिस अधिकारी प्रभु शंकर और इंस्पेक्टर निरंजन कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दर्ज प्राथमिकियों को रद्द करने की मांग की। हाईकोर्ट ने सितंबर, 2021 में सभी पक्षों को सुनने के बाद यह कहते हुए दर्ज प्राथमिकियां रद्द कर दी।

सामान्य प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने किन अधिकारियों पर दर्ज प्राथमिकी को रद्द किया?
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर दर्ज 6 प्राथमिकी को रद्द किया।
Hindustan | Bureau

लेखक के बारे में

Hindustan | Bureau

हिन्दुस्तान भारत का एक प्रतिष्ठित हिंदी समाचार-पत्र है, जिसकी स्थापना 1936 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को समेटे यह प्रकाशन आज भारत के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले हिंदी समाचार-पत्रों में दूसरे स्थान पर है। WAN-IFRA के अनुसार, 2016 में 'हिन्दुस्तान' विश्व के शीर्ष 13 सर्वाधिक प्रसारित अखबारों में शामिल था। हर रोज 5 राज्‍यों सह‍ित देश की राजधानी द‍िल्‍ली और एनसीआर (नोएडा, गाज‍ियाबाद, गुरुग्राम) में 23 संस्‍करण प्रकाश‍ित होते हैं। ‘पाठक सर्वोपर‍ि’ हिन्दुस्तान की संपादकीय नीति है। समय पर, शोध और गहन खोजबीन के बाद व‍िस्‍तार से न्‍यूज र‍िपोर्ट प्रकाश‍ित की जाती है। हर खबर में सभी पक्षों और दृष्टिकोणों को संतुलित रूप से पेश किया जाता है।

और पढ़ें
Hindi News , इंडिया न्यूज़ , आज का मौसम , विधानसभा चुनाव और Sawan 2026 से जुड़ी ताज़ा खबरों व पल-पल के अपडेट के लिए लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े रहें। UP Chunav 2027 , UP Vidhan Sabha Seats और UP Vidhan Sabha Candisates से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण खबरें और जानकारी यहां पढ़ें। सभी बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ऐप अभी डाउनलोड करें।
Hindi NewsIndia News‘केस रद्द करने की शक्ति का इस्तेमाल सोच-समझकर करें हाईकोर्ट’