शारीरिक दंड पोक्सो के तहत अपराध नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शारीरिक दंड देना पोक्सो अधिनियम के तहत अपराध नहीं है। कोर्ट ने एक शिक्षक के खिलाफ दर्ज मुकदमा रद्द किया, जिसने नाबालिग छात्रा को मारा था। न्यायालय ने कहा कि शिक्षक का तरीका गलत था, लेकिन यौन इरादा साबित नहीं हुआ।

सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि शारीरिक दंड देना पोक्सो अधिनियम के तहत अपराध नहीं है। शीर्ष अदालत ने पोक्सो अधिनियम के तहत एक शिक्षक के खिलाफ दर्ज मुकदमा रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। शिक्षक पर आरोप था कि उसने नाबालिग छात्रा की पीठ और कमर पर मारा था। न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि 'बच्ची को शारीरिक सजा देने का शिक्षक का तरीका गलत और असंवेदनशील था, लेकिन उसके कृत्य में पोक्सो कानून के तहत अपराध बनाने के लिए जरूरी सेक्सुअल इरादा जाहिर नहीं हुआ। यह टिप्पणी करते हुए पीठ ने शिक्षक के खिलाफ पोक्सो अधिनियम की धारा 10 के तहत गंभीर यौन हमला के आरोप में दर्ज मुकदमा रद्द कर दिया। पीठ ने कहा कि छात्राओं के बयानों से यह पता नहीं चलता कि शिक्षक ने उन्हें यौन इरादे से छुआ था, जो पोक्सो अधिनियम के तहत यौन हमले का मामला बनने के लिए जरूरी है। हालांकि पीठ ने कहा कि शिक्षक का शारीरिक सजा देना गलत था और छात्राओं के साथ व्यवहार करते समय उन्हें अधिक संवेदनशील होना चाहिए था। साथ ही कहा कि सिर्फ इस असंवेदनशीला व्यवहार के आधार पर शिक्षक पोक्सो के तहत गंभीर यौन हमले का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
शिक्षक का भी परिवार होता है
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 'लड़कियों के स्कूल या को-एजुकेशनल स्कूल में काम करने वाले शिक्षक के लिए, इस तरह का आरोप या मुकदमा असल में उसे न सिर्फ उसके पूरे टीचिंग कॅरियर के लिए, बल्कि उसकी जिंदगी के लिए भी दोषी ठहराने जैसा है। शिक्षक का भी परिवार होता है। इसलिए, किसी शिक्षक पर छात्राओं के साथ यौन हमला करने का आरोप लगाना उस शिक्षक के लिए बर्बादी जैसा होगा।
आरोप से बरी होने से शिक्षक को लाभ नहीं होगा
पीठ ने फैसले में कहा कि आखिर में अपीलकर्ता को अरोप से बरी होने से भी कोई लाभ नहीं होगा क्योंकि अभियोजन द्वारा मुकदमा से जो नुकसान होगा, उसकी भपराई के लिए यह (बरी होना) काफी नहीं होगा। इससे शिक्षक पर ऐसा कलंक लगेगा जिसे ठीक नहीं किया जा सकता।’ पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ शिक्षक की अपील पर यह फैसला दिया है。


