व्यभिचार साबित होने पर पत्नी गुजाराभत्ता की हकदार नहीं होगी : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी पर व्यभिचार साबित हो जाता है, तो वह गुजारा-भत्ता की हकदार नहीं होगी। अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पति की याचिका पर यह निर्णय दिया। पति ने पत्नी पर व्यभिचार के आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि पत्नी पर व्यभिचार साबित हो जाता है तो वह किसी भी तरह के गुजारा-भत्ता की हकदार नहीं होगी। शीर्ष अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पति की ओर से दाखिल याचिका पर टिप्पणी की। जस्टिस संजय करोल और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह भी कहा कि पति व्यभिचार का आरोप लगाता है, तो पत्नी को अंतरिम गुजारा-भत्ता देने से पहले अदालत को सबसे पहले इस मुद्दे पर विचार करना चाहिए। अदालतों का यह मानना गलत होगा कि ऐसे सवाल पर सिर्फ अंतिम फैसले के समय ही विचार किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ‘चूंकि सीआरपीसी की धारा 125 (4) में यह प्रावधान है कि अगर व्यभिचार साबित हो जाता है, तो पत्नी न तो अंतरिम और न ही अंतिम गुजारा-भत्ते की हकदार होगी।
निचली अदालत और हाईकोर्ट ने पति की मांग खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ पति की अपील को स्वीकार कर लिया, जिसमें व्यभिचार के आधार पर गुजाराभत्ता देने का विरोध करने वाली उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी। अपीलकर्ता की शादी 7 जुलाई, 2014 को हुई थी और शादी के महज कुछ ही दिन बाद पत्नी से विवाद शुरू हो गया जिसके चलते कथित तौर पर महिला ने पति पर आरोप लगाए और पुलिस में कुछ शिकायतें भी दर्ज कराईं। आरोप है कि 13 मई, 2020 को वह अपने बच्चे और कीमती सामान के साथ अपना ससुराल छोड़कर चली गई।
पत्नी के व्यभिचार के सबूत दिए गए
पति से अलग होने के बाद महिला ने उदयपुर के निचली अदालत में अर्जी दाखिल कर अंतरिम गुजाराभत्ता की मांग की। इसके बाद, पति ने सीआरपीसी की धारा 125(4) के तहत तहत अर्जी दाखिल कर पत्नी पर व्यभिचार का आरोप लगाया और इस आधार पर गुजाराभत्ता का आदेश नहीं देने का अदालत से आग्रह किया। पहले निचली अदालत और बाद में हाईकोर्ट ने भी पति की इस मांग को खारिज कर दिया। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी।
निजी जासूस की भूमिका को लेकर बने कानून
अब सुप्रीम कोर्ट ने पति हक में पारित अपने फैसले में कहा कि यह साबित करने के लिए कि पत्नी व्यभिचार में रह रही थी, पति ने कई तस्वीरें और अन्य साक्ष्य पेश किए हैं। यह साक्ष्य साफ तौर पर इलेक्ट्रॉनिक है। पीठ ने कहा कि अंतरिम गुजारा-भत्ता तय करने के चरण में ही अदालत को यह देखना होगा कि क्या पेश किए गए सबूत से व्यभिचार साबित होता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वैवाहिक विवादों में साक्ष्य जुटाने के लिए देश में बढ़ते निजी जासूसों की भूमिका की निगरानी करने की जरूरत है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को निजी जासूसी एजेंसियों के नियमन के लिए कानून का एक नियामक ढांचा तैयार करने को कहा है। पीठ ने पति द्वारा अपनी पत्नी की तस्वीरें और वीडियो हासिल करने के लिए निजी जासूसों का इस्तेमाल करने पर सवाल उठाते हुए यह निर्देश दिए। पीठ ने कहा कि साक्ष्य इकट्ठा करने के बदलते तरीकों से निपटने के लिए एक तंत्र विकसित करने की जरूरत है। पीठ ने फैसले की प्रति विधि एवं न्याय मंत्रालय के सचिव और भारत के विधि आयोग के अध्यक्ष को भेजने का निर्देश दिया।


