नया धंधा बन गया है आरटीआई एक्टिविज्म : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरटीआई एक्टिविज्म अब एक नया व्यवसाय बन गया है। आरोपी RTI कार्यकर्ता राकेश कुमार बहल को सड़क निर्माण कार्य में बाधा डालने के आरोप में अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया गया। न्यायालय ने उनके कार्यों पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या वे उच्च अधिकारी हैं जो निर्माण की निगरानी कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि सूचना के अधिकार अधिनियम यानी आरटीआई एक्टिविज्म (हर मुद्दे पर) एक नया व्यवसाय बन गया है। शीर्ष अदालत ने सड़क निर्माण कार्य से जुड़े सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने के आरोप में दर्ज मामले में आरोपी आरटीआई कार्यकर्ता को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की। जस्टिस संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की पीठ ने आरोपी राकेश कुमार बहल को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। जस्टिस मेहता ने मौखिक तौर पर कहा कि आजकल आरटीआई एक्टिविज्म एक नया धंधा बन गया है।
उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार ने धन दिया तो वह सड़क निर्माण के गुणवत्ता का ध्यान रखेगी, आप कोई नहीं हैं। याचिका खारिज की जाती है।जस्टिस बिश्नोई ने भी याचिकाकर्ता के भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि आप (आरोपी बहल) सड़क निर्माण की निगरानी क्यों कर रहे थे? उन्होंने आरोपी बहल से कहा कि आप कौन होते हैं सड़क निर्माण की प्रगति या ऐसी अन्य चीजों की निगरानी करने वाले? क्या आप कोई उच्च अधिकारी हैं? इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी बहल को अग्रिम जमानत देने से इनकर कर दिया। आरटीआई कार्यकर्ता बहल ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने बहल को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। आरोपी बहल पर एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर सड़क निर्माण के चल रहे काम में बाधा डालने और शिकायतकर्ता (जिसकी देखरेख में काम हो रहा था) और निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को धमकाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया। आरोप है कि आरोपी ने शिकायतकर्ता सरकारी कर्मचारी के साथ मारपीट भी की। इस मामले में हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है।
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