पॉक्सो के गलत इस्तेमाल पर चिंता: घर से भागे लड़का-लड़की को कैसे रोक सकता है राज्य- सुप्रीम कोर्ट

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने प्रेम संबंध में बंधे किशोरों के भागने पर सवाल उठाया, कि राज्य कैसे रोक सकता है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि किशोर लड़कियों के भागने पर माता-पिता अक्सर कानूनी कार्रवाई करते हैं। इस सिलसिले में एक नाबालिग लड़की के मामले को लेकर चर्चा हुई, जिसे एक युवक के साथ रहने में कोई आपत्ति नहीं थी।

पॉक्सो के गलत इस्तेमाल पर चिंता: घर से भागे लड़का-लड़की को कैसे रोक सकता है राज्य- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। विशेष संवाददातार सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सवाल किया कि ‘राज्य प्रेम संबंध में बंधे लड़के और लड़की के भागने को कैसे रोक सकता है?’ शीर्ष अदालत ने आपसी सहमति से बने यौन संबंधों वाले किशोरों के खिलाफ बच्चों को यौन उत्पीड़न से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के प्रवाधनों पर चिंता जाहिर करते हुए यह टिप्पणी की।

किशोरियों की भागने की समस्या

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि ‘जब किशोर लड़कियां अपने प्रेमी के साथ भाग जाती हैं, तो माता-पिता अक्सर अपनी तथाकथित ‘इज्जत/प्रतिष्ठा’ बचाने के लिए आपराधिक कानूनी कार्रवाई का सहारा लेते हैं।’ जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि ‘राज्य किसी लड़की और लड़के के भागने को कैसे रोक सकता है? उन्होंने यह भी कहा कि 15 से 18 साल की उम्र संवेदनशील होती है और यह नई चीजें आजमाने या अनुभव करने की उम्र है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या यह वाकई पॉक्सो का मामला बनता है?’ सुप्रीम कोर्ट ने किशोरों की निजता के अधिकार से जुड़े एक स्वतः संज्ञान लेकर शुरू किए गए मामले की सुनवाई करने के दौरान यह टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय के 2023 के एक विवादित फैसले के बाद स्वत: संज्ञान लेकर शुरू किया था, जिसमें किशोर लड़कियों से कहा गया था कि वे रिश्तों में पड़ने के बजाय अपनी यौन इच्छाओं पर ‘काबू’ रखें। बाद में, किशोरों की निजता के अधिकार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज होने और कई निर्देश जारी होने के बाद, 2024 में शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया था।

कानूनी कार्यवाही और समाज

वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने पीठ से कहा कि इस मामले की शुरुआत एक नाबालिग लड़की के 25 साल के युवक के साथ भागने से हुई थी। उन्होंने कहा कि कोर्ट द्वारा नियुक्त एक समिति ने उस युवती से बातचीत की थी, जिसके बाद उस व्यक्तिगत मामले को मोटे तौर पर बंद कर दिया गया था। वरिष्ठ अधिवक्ता ने पीठ से पॉक्सो मामलों में सिस्टम की विफलता को लेकर एक सख्त रिपोर्ट दाखिल की थी। उन्होंने यह भी कहा कि पॉक्सो कानून के तहत नाबालिगों को पुनर्वास के कुछ उपाय पाने का अधिकार है। शीर्ष अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता से पूछा कि क्या यह भागने का मामला था या अपहरण का। इस पर उन्होंने पीठ से कहा था कि कथित पीड़िता उस युवक के साथ रहना चाहती थी और उससे उसका एक बच्चा भी है। वरिष्ठ अधिवक्ता दीवान ने शीर्ष अदालत से कहा कि कानून के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए एक तंत्र बनाने की जरूरत है।

किशोरों की भलाई

सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि ‘पीड़ित लड़की अपने पति के साथ रह रही है और खुश है। बड़ा मुद्दा किशोरों की भलाई और बच्चों की सुरक्षा के उपाय अपनाना है। साथ ही, युवाओं को जागरूक करने की जरूरत पर भी जोर दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 जुलाई को होगी। पीठ ने कहा कि किशोरों के बीच ऐसे शारीरिक संबंध 2012 में सहमति की उम्र 16 से बढ़ाकर 18 साल किए जाने से पहले भी होते थे। पीठ ने कहा कि ‘ऐसा नहीं है कि ये मामले 2012 के बाद ही हो रहे हैं। ये मामले लंबे समय से हो रहे हैं, बाल विवाह भी होते थे। जब सहमति की उम्र 18 साल हुई, तो यह गैर-कानूनी हो गया।’ पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि उसके निर्देश व्यावहारिक होने चाहिए। केंद्र सरकार ने कहा कि उसने कुछ सिफारिशें की हैं और अगर उन्हें मान लिया जाता है, तो इन नियमों को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जमीनी स्तर पर लागू किया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने किशोर संबंधों पर क्या सवाल उठाया?
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि राज्य कैसे रोक सकता है कि किशोर लड़के और लड़की भागें।
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