दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाने पर बिहार को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने दीपक प्रकाश की पुनः मंत्री नियुक्ति के खिलाफ याचिका पर बिहार सरकार और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि प्रकाश ने किसी सदन की सदस्यता के बिना मंत्री पद ग्रहण किया है, जो असंवैधानिक है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय लोक मार्चा (आरएलएम) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर राज्य सरकार और भारत के निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत में दाखिल याचिका में बिना किसी सदन की सदस्यता प्राप्त किए बिना प्रकाश को दोबारा से मंत्री बनाए जाने को चुनौती देते हुए, उन्हें पद से हटाने की मांग की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ती वी. मोहना की पीठ ने इस मामले में बिहार सरकार और निर्वाचन आयोग के अलावा, राज्य में पंचायती राज्य मंत्री दीपक प्रकाश को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने राकेश कुमार सिंह की ओर से दाखिल याचिका में पर यह आदेश दिया है। सिंह ने अपनी याचिका में बिहार सरकार को यह बताने का निर्देश देने की मांग की है कि प्रकाश किस कानूनी और संवैधानिक आधार पर बिहार सरकार में मंत्री पद पर बने हुए हैं। याचिका में, 7 मई को दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाए जाने, पद पर बने रहने को असंवैधानिक, गैर-कानूनी और संविधान के अनुच्छेद 164(4) के खिलाफ बतााया है। अनुच्छेद 164(4) किसी ऐसे व्यक्ति को मंत्री नियुक्त करने की अनुमति देता है जो विधायक नहीं है, लेकिन यह केवल एक अस्थायी अपवाद के तौर पर होता है। ऐसे व्यक्ति को छह महीने में राज्य विधानमंडल की सदस्यता हासिल करनी होती है। सदन की सदस्यता नहीं लेने पर पर मंत्री को पद छोड़ना पड़ता है।
नीतीश सरकार में भी मंत्री थे प्रकाश
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुदीप चंद्रा और सान्य कौशल ने पीठ को बताया कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता प्रकाश ने पहली बार 20 नवंबर, 2025 को नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में पंचायती राज मंत्री के तौर पर शपथ ली थी, जबकि वे बिहार विधानसभा या बिहार विधान परिषद के निर्वाचित सदस्य नहीं थे।
प्रकाश के पास राज्य के किसी सदन की सदस्यता नहीं
पीठ को बताया गया कि 15 अप्रैल, 2026 को सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। 22 दिनों (19 मई, 2026-अप्रैल 2026) के इस अंतरिम समय के दौरान, प्रकाश किसी मंत्री पद पर नहीं थे। याचिका में कहा गया कि 7 मई, 2026 को बिहार मंत्रिमंडल के विस्तार के दौरान दीपक प्रकाश को दोबारा पंचायती राज मंत्री नियुक्त किया गया, जबकि उन्होंने बिहार विधानमंडल के किसी भी सदन की सदस्यता हासिल नहीं की है।
सरकार संवैधानिक सीमा को दरकिनार नहीं कर सकती
याचिका में कहा गया है कि सरकार किसी मंत्री के कार्यकाल को तोड़कर और थोड़े अंतराल के बाद उसी व्यक्ति को दोबारा नियुक्त करके संवैधानिक सीमा को दरकिनार नहीं कर सकती। याचिका में कहा गया है कि ऐसी कार्रवाई संवैधानिक शक्ति का दिखावटी इस्तेमाल है, जिसका मकसद अप्रत्यक्ष रूप से वह हासिल करना है जो सीधे तौर पर नहीं किया जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह मामला सिर्फ दीपक प्रकाश की नियुक्ति का नहीं है, बल्कि संसदीय लोकतंत्र, संवैधानिक जवाबदेही और संविधान के तहत कार्यकारी शक्ति की सीमाओं की रक्षा का है।
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