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महिलाओं का खतना हो सकेगा बैन, SC ने उठाए सवाल, सरकार भी समर्थन में

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम नाबालिग लड़कियों के खतने पर उठाए सवाल।

सुप्रीम कोर्ट ने दाऊदी बोहरा मुस्लिम समाज में नाबालिग लड़कियों का खतना करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिला को अपनी जिंदगी सिर्फ विवाह और पति के लिए ही नहीं जीनी होती। उसके कुछ और भी कर्तव्य हो सकते हैं।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने यह सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं की पति के लिए यह अधीनता संविधान का परीक्षण पास नहीं कर सकती। यह व्यवहार उनके निजता के अधिकार का उल्लंघन है। 

इस मामले में केंद्र सरकार ने इस प्रथा के खिलाफ सुनीता तिवारी आदि द्वारा दायर याचिकाओं का समर्थन किया है। सरकार ने कहा कि वह धर्म के नाम पर ऐसे किसी भी ऐसे व्यवहार का विरोध करती है जो  महिलाओं के शारीरिक अंगों की अखंडता का उल्लंघन करता है। अनेक यूरोपीय और अफ्रीकी देशों में लड़कियों के खतने को अपराध घोषित किया गया है। 

पीठ ने कहा कि सिर्फ इसलिए महिलाओं के साथ यह प्रथा जारी नहीं रह सकती कि उन्हें विवाह करना है। महिला के विवाह से बाहर भी अनेक अन्य कर्तव्य हो सकते हैं। इस मामले में कोर्ट ने पिछले दिनों महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और दिल्ली की सरकारों को नोटिस जारी किए थे। इसके बाद केरल और तेलंगाना को भी इस मामले मे पक्ष बनाया गया था। 

दाऊदी बोहरा समुदाय की प्रथा 

दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में लड़कियों का खतना करने की प्रथा जारी है। इसे वह कफज कहते हैं, जिसमें लड़की की योनि के ऊपरी हिस्से को पूरा या आंशिक रूप से काटकर अलग कर दिया जाता है। कफज छह वर्ष की लड़कियों का किया जाता  है। मान्यता के अनुसार, कफज से लड़कियों की यौनेच्छा को दबा दिया जाता है, ताकि वह विवाह होने के बाद बाहर न भटक सकें। समुदाय ने इस प्रथा का बचाव किया है और इसे धार्मिक बताया है। गौरतलब है कि दाऊदी बोहरा शिया मत का एक समुदाय है।  

पति को खुश करने के लिए महिला ही जिम्मेदार क्यों?
 
महिलाओं का दर्द समझते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खतने जैसे कृत्य औरत को आदमी के लिए तैयार करने के लिए किए जाते हैं। महिलाओं के साथ ऐसा करना जानवर की बर्ताव करना है। कोर्ट ने पूछा कि महिला पर ही यह जिम्मेदारी क्यों हो कि वह पति को खुश करे।

केंद्र सरकार भी इस प्रथा पर चाहती है प्रतिबंध

केंद्र सरकार भी नाबालिग लड़कियों के खतने के खिलाफ है। सरकार ने खतने के खिलाफ कोर्ट में दायर याचिका का समर्थन किया है। याचिका में दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय की नाबालिग लड़कियों का खतना किए जाने की प्रथा का विरोध किया गया है। 

एडवोकेट ने बताया अपराध 

नाबालिग लड़कियों के खतने के विरोध में दलील देते हुए अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि ऐसे कृत्यों को सिर्फ इसलिए इजाजत नहीं दी जा सकती है क्योंकि इसे प्रथा बताया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्राइवेट पार्ट को छूना पॉस्को एक्ट के तहत अपराध है। 

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  • Web Title:supreme court questions on female genital mutilation says women do not live only for marriage and husband