जब वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध मानने का कानून है तो क्या पति पर पत्नी से दुष्कर्म का मुकदमा चलाया जा सकता

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब ‘वैवाहिक दुष्कर्म’ कानून में दुष्कर्म का अपराध नहीं है, तो पति के खिलाफ आरोप कैसे लग सकता है। यह टिप्पणी कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के संदर्भ में की गई, जिसमें कहा गया था कि यदि पति ने पत्नी की मर्जी के बिना शारीरिक संबंध बनाए हैं, तो आरोप लगाया जा सकता है।

जब वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध मानने का कानून है तो क्या पति पर पत्नी से दुष्कर्म का मुकदमा चलाया जा सकता

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि जब ‘वैवाहिक दुष्कर्म’ ‌को दुष्कर्म का अपराध नहीं मानने का कानून अभी मौजूद है तो पति के खिलाफ पत्नी से दुष्कर्म करने के आरोप में मुकदमा कैसे चलाया जा सकता है? शीर्ष अदालत ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक फैसले के संदर्भ में यह सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि कानून में मौजूद अपवाद ञपूरी तरह लागू नहीं होती है और जो पति अपनी पत्नी के साथ उसकी मर्जी के बगैर शारीरिक संबंध बनाता है, उस पर दुष्कर्म के आरोप में मुकदमा चलाया जा सकता है。

कानूनी प्रावधान की समीक्षा

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और उसकी जगह लेने वाले कानून भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने के प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार करते हुए यह टिप्पणी की। पीठ ने सवालिया लहजे में कहा ‘क्या अदालत किसी पति पर अपनी पत्नी के साथ दुष्कर्म का मुकदमा चला सकता है, जबकि इस छूट की संवैधानिक वैधता पर अभी फैसला आना बाकी है।

पीड़ितों की सुरक्षा

जस्टिस बागची ने कहा ‘जब तक हम इस अपवाद (वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने का प्रावधान) की संवैधानिक वैधता पर कोई फैसला नहीं ले लेते, क्या पति के खिलाफ पत्नी से दुष्कर्म का मुकदमा चलाने की इजाजत दी जा सकती है? हम पीड़ितों की सुरक्षा जरूर करेंगे। लेकिन क्या किसी ऐसे व्यक्ति पर मुकदमा चलाना अभियोजन के अधिकार क्षेत्र में आता है, जिसके मामले में आईपीसी की धारा 375 (या संबंधित बीएनएस प्रावधान) में एक अपवाद की स्पष्ट परिभाषा दी गई है?

सुनवाई की तारीख

मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि उन्हें पता नहीं कि किसे पीड़ित कहा जा रहा है। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता एनएस नप्पिनई की दलील के मुताबिक, शादी के दौरान बिना मर्जी से शारीरिक संबंध करने वाली महिला ‘पीड़ित’ है। कोर्ट के लिए बस यही सवाल है कि क्या राज्य शिकायत में बताए गए कृत्य को ‘दुष्कर्म’ मानता है।

अंतिम सुनवाई की प्रक्रिया

वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध की श्रेणी में लाने की मांग पर तीन सप्ताह बाद शुरू होगी अंतिम सुनवाई।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध की श्रेणी में लाने की मांग वाली याचिकाओं पर तीन सप्ताह बाद अंतिम सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत ने वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने वाले कानूनी प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी ) की धारा 375 के अपवाद -2 के तहत यदि कोई विवावित पुरुष अपनी बालिग पत्नी से शारीरिक संबंध बनाता है तो उसे दुष्कर्म नहीं माना जाएगा। वर्ष द्वारा 2023 में बनाए गए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में भी यही प्रावधान को बरकरार रखा गया है। नए कानून बीएनएस की धारा 63 (दुष्कर्म) का अपवाद 2 कहता है कि ‘किसी पुरुष द्वारा अपनी बालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाना या यौन क्रिया करना दुष्कर्म का अपराध नहीं माना जाएगा। पीठ ने कहा कि मामले को तीन सप्ताह बाद अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। पीठ ने यह भी संकेत दिया कि मामले की सुनवाई बुधवार और गुरुवार को होगी। पीठ ने कहा कि सुनवाई की निश्चित तारीख की सूचना देंगे। इससे पहले, केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि मुख्य मामले में केंद्र द्वारा पहले दाखिल किए गए जवाबी हलफनामे को अन्य याचिकाओं में भी जवाब के तौर पर माना जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बहस के दौरान ‘वह उन पहलुओं की समीक्षा करेगी जिनमें यह शामिल है कि क्या वैवाहिक दुष्कर्म का अपवाद बने रहने पर भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है? क्या यह अपवाद खुद संवैधानिक रूप से वैध है।’ इससे पहले, मुख्य न्यायाधीश ने 7 सितंबर को, वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह कहा था कि इस मुद्दे पर सुनवाई के लिए कोई उपयुक्त तारीख तय करने से पहले याचिकाओं पर केंद्र का रुख जानना चाहेंगेा।

शीर्ष अदालत ने 16 जनवरी, 2023 को उन याचिकाओं पर केंद्र से जवाब मांगा था जिनमें आईपीसी के उस प्रावधान को चुनौती दी गई है जो पत्नी के बालिग होने पर जबरदस्ती यौन संबंध बनाने के लिए पति को कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा देता है। बाद में, कोर्ट ने इस मुद्दे पर बीएनएस के प्रावधान को चुनौती देने वाली एक जैसी याचिका पर केंद्र को नोटिस भी जारी किया।

सवाल और जवाब

✦सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक दुष्कर्म के मामले में क्या सवाल उठाया?−
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब ‘वैवाहिक दुष्कर्म’ ‌को दुष्कर्म का अपराध नहीं मानने का कानून अभी मौजूद है, तो पति के खिलाफ पत्नी से दुष्कर्म करने के आरोप में मुकदमा कैसे चलाया जा सकता है?
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