क्या अर्धसैनिक बलों में नेतृत्व करने वाले योग्य अधिकारी नहीं?
सुप्रीम कोर्ट ने अर्धसैनिक बलों में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति पर केंद्र से सवाल किया कि क्या योग्य अधिकारी नहीं हैं। न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां ने कहा कि कई अधिकारी हैं जिन्होंने लंबी सेवा की है, लेकिन उन्हें नेतृत्व नहीं दिया गया। केंद्र सरकार ने इसे नीतिगत फैसला बताया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अर्धसैनिक बलों में प्रतिनियुक्ति और वरिष्ठता को लेकर आईपीएस अधिकारियों तथा बल के खुद के अधिकारियों के बीच जारी विवाद को सुलझाने में कथित नाकामी पर केंद्र से बुधवार को सवाल किया। शीर्ष अदालत ने पूछा कि क्या अर्धसैनिक बलों में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए कोई योग्य अधिकारी नहीं हैं? न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने बुधवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को लेकर केंद्र से सवाल करते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से पूछा कि क्या अर्धसैनिक बलों में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए कोई योग्य अधिकारी नहीं हैं।
न्यायमूर्ति भुइयां ने पूछा कि क्या आपको लगता है कि सीएपीएफ में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए कोई योग्य अधिकारी नहीं है? इसे गलत कदम बताते हुए न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि ऐसे अधिकारी भी हैं जिन्होंने सीआरपीएफ, आईटीबीपी और बीएसएफ में 25-30 साल तक सेवा की है, फिर भी उन्हें नेतृत्व की भूमिकाएं नहीं दी गई हैं। उन्होंने कहा कि आप उनके साथ ऐसा बर्ताव क्यों कर रहे हैं? जस्टिस भुइयां ने कहा कि वे भी हमारी सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। वे भी हमारे लिए लड़ रहे हैं और सर्वोच्च बलिदान दे रहे हैं।सरकारी वकील ने सरकार के कदम का बचाव करते हुए कहा कि सीएपीएफ से जुड़ा फैसला ‘एक के मुकाबले दूसरा’ वाला मुद्दा नहीं, बल्कि एक नीतिगत फैसला है। चार अगस्त को पीठ ने 34 सीएपीएफ अधिकारियों की याचिका को लंबित मामलों के साथ जोड़ दिया था। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। याचिका में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि यह शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत का उल्लंघन करता है।


