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जोर से बोलने और जजों को धमकाने की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट खफा

सुप्रीम कोर्ट

हाल ही में कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ जोर से बोलने और जजों को कथित रूप से धमकाने की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह का आचरण आपकी अक्षमता को दर्शाता है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संविधान पीठ इस सवाल पर विचार कर रही है कि क्या दूसरे धर्म के व्यक्ति के साथ विवाह करने पर पारसी महिला की अपनी धार्मिक पहचान खत्म हो जाती है। 

सीजेआई ने कहा, ‘वकीलों को परंपरागत रूप से न्याय का मंत्री कहा जाता है। दुर्भाग्य से वकीलों का एक छोटा समूह सोचता है कि वे अपनी आवाज तेज कर सकते हैं और अधिकार के साथ बहस कर सकते हैं। इस तरह से आवाज बुलंद करना सिर्फ अयोग्यता और अक्षमता ही दर्शाता है।  ऐसे लोग वरिष्ठता के योग्य भी नहीं हैं।’

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद और दिल्ली-केंद्र के बीच विवाद जैसे मामलों की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा ऊंची आवाज में बोलने की बढ़ती घटनाओं से खिन्न थी। पीठ ने कहा, जो कुछ कल (दिल्ली-केंद्र प्रकरण) में हुआ वह  उद्दंडता थी और जो उससे एक दिन पहले (अयोध्या प्रकरण) में हुआ वह तो और भी अधिक उद्दंडता थी। 

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अयोध्या मामले में 5 दिसंबर को कपिल सिब्बल, राजीव धवन और दुष्यंत दवे सहित अनेक वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इसकी  सुनवाई जुलाई, 2019 तक स्थगित करने का अनुरोध करते हुए बहुत ही ऊंची आवाज में दलीलें पेश की थीं। इनमें से कुछ ने तो बहिष्कार करने तक की धमकी दे डाली थी। इसी तरह, दिल्ली-केंद्र विवाद मामले की सुनवाई के दौरान बुधवार को राजीव धवन ने कुछ दलीलें दीं, जिनकी पीठ ने सराहना नहीं की थी।

पीठ ने कहा, ‘जब वकील इस तरह से बहस करते हैं जो संवैधानिक भाषा के अनुरूप नहीं है, तो हम बर्दाश्त करते हैं परंतु कब तक? यदि बार काउंसिल ऑफ इंडिया खुद को नियंत्रित नहीं करेगी तो हमें उसे नियंत्रित करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।’

शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब पारसी धर्मांतरण मामले में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमणियम ने न्यायालय में वकीलों के ऊंची आवाज में बोलने का मसला उठाया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा जोर-जोर से बोलने की प्रवृत्ति गंभीर है और वकीलों को संयम बरतने के साथ ही न्यायिक संस्थान के प्रति सम्मान दिखाना चाहिए।

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  • Web Title:Supreme Court overturns incidents of speaking loud and threatening judges
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