एनडीपीएस मामलों के लिए जल्द विशेष कोर्ट बनाएं
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे ड्रग-रोधी मामलों में बढ़ती चिंताओं के लिए जल्दी से विशेष अदालतें बनाएं। मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों ने बताया कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत 449 विशेष अदालतों की आवश्यकता है। सभी अधिकारियों को छह हफ्ते में आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे ड्रग-रोधी कानून के तहत मामलों में ‘चिंताजनक बढ़ोतरी’ से निपटने के लिए जल्द से जल्द विशेष अदालत बनाएं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत मामलों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए 449 विशेष अदालत की जरूरत है। इनमें से 176 पहले से ही काम कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि एनपीपीएस अधिनियम के तहत मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी को देखते हुए, यह जरूरी है कि सभी जरूरी अदालत जल्द से जल्द स्थापित की जाएं।
पीठ ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जरूरी कदम उठाएं और इन विशेष अदालत को बनाने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराएं, और हो सके तो छह हफ्ते में ऐसा करें। सुप्रीम कोर्ट ‘एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा था।


