बैंक बिल्डर की सांठगांठ की जांच के लिए सीबीआई को अधिकारी देने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय परियोजनाओं में धोखाधड़ी के लिए बैंकों और बिल्डरों की सांठगांठ की जांच में तेजी लाने का आदेश दिया है। इसके लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों को सीबीआई के अनुरोधों पर तेजी से कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आवासीय परियोजनाओं में घर खरीददारों के मेहनत की कमाई ठगने और धोखाधड़ी के लिए बैंकों और बिल्डरों की सांठगांठ की जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने इसके लिए सात राज्यों को 10 दिनों के सीबीआई को अतिरिक्त पुलिस अधिकारी उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।
बैंकों और वित्तीय संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी मोहना की पीठ ने होम लोन मुहैया कराने वाले वित्तीय संस्थानों के अलावा भारतीय स्टेट बैंक, यूको बैंक, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और सम्मान कैपिटल को भी निर्देश दिया कि वे अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 19 के तहत मंजूरी के लिए सीबीआई के अनुरोधों पर तेजी से कार्रवाई करें, जो जांच के दौरान प्रथम दृष्टा इस सांठगांठ में शामिल पाए गए हैं।
सामाजिक विफलताओं की याचिकाएँ
सुप्रीम कोर्ट ने होम लोन अनुदान योजनाओं में बैंकों, वित्तिय कंपनियों और सरकारी प्राधिकरणों द्वारा कथित प्रणालीगत विफलताओं से संबंधित याचिकाओं पर विचार करते हुए यह आदेश दिया है।
अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों की आवश्यकता
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इन मामलों की जांच के चलते काम का बोझ बढ़ गया है। सीबीआई से जांच में तेजी लाने के लाने के लिए उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और कर्नाटक सरकार को अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों या प्रतिनियुक्ति पर अधिकारी महैया कराने का आदेश दिया।
सीबीआई ने कहा कि इस बारे में सीबीआई निदेशक द्वारा राज्यों को भेजे गए संचार के बावजूद, न तो अतिरिक्त कर्मियों को प्रदान किया गया था और न ही संबंधित पुलिस प्रमुखों ने जवाब दिया था। इसके बाद पीठ ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और कर्नाटक के पुलिस महानिदेशकों को सीबीआई के अनुरोधों पर विचार करने और उपयुक्त अतिरिक्त पुलिस अधिकारी प्रदान करने का निर्देश दिया। पीठ ने अपेक्षित अधिकारियों को जल्द से जल्द नामित या प्रतिनियुक्त पर सीबीआई में भेजने का आदेश दिया और कहा कि यह 10 दिन के भीतर होने चाहिए। राज्यों ने सीबीआई को अधिकारी मुहैया कराने का भरोसा दिया।
परिणाम और आरोप पत्र
17 मामलों में आरोप पत्र दाखिल, जबकि एक में क्लोजर रिपोर्ट
इससे पहले, सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 17 मामलों में आरोप पत्र दायर किए गए हैं, जबकि एक मामले में क्लोजर रिपोर्ट दायर की गई है। सीबीआई द्वारा दाखिल पांचवीं पूरक स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, जिन 17 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए गए, उनमें से तीन में संज्ञान लिया जा चुका है, जबकि पांच मामलों में, सीबीआई ने वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की और उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपित किया। हालांकि, अधिनियम की धारा 19 के तहत उनके अभियोजन की मंजूरी सक्षम अधिकारियों से प्रतीक्षित है। रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न बैंकों से कुल 34 अभियोजन स्वीकृतियों का प्रतीक्षित है।
महत्वपूर्ण प्रश्न
लेखक के बारे में
Hindustan | Bureauहिन्दुस्तान भारत का एक प्रतिष्ठित हिंदी समाचार-पत्र है, जिसकी स्थापना 1936 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को समेटे यह प्रकाशन आज भारत के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले हिंदी समाचार-पत्रों में दूसरे स्थान पर है। WAN-IFRA के अनुसार, 2016 में 'हिन्दुस्तान' विश्व के शीर्ष 13 सर्वाधिक प्रसारित अखबारों में शामिल था। हर रोज 5 राज्यों सहित देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम) में 23 संस्करण प्रकाशित होते हैं। ‘पाठक सर्वोपरि’ हिन्दुस्तान की संपादकीय नीति है। समय पर, शोध और गहन खोजबीन के बाद विस्तार से न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है। हर खबर में सभी पक्षों और दृष्टिकोणों को संतुलित रूप से पेश किया जाता है।
और पढ़ें

