जेल निरीक्षण के लिए विजिटर्स बोर्ड बनाने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे जेलों की निगरानी के लिए 'बोर्ड ऑफ विजिटर्स' का गठन करें। प्रधान जिला जज इस बोर्ड के प्रमुख होंगे। यह आदेश जेलों में भेदभाव की समस्या को सुलझाने के लिए दिया गया है, जिसमें जाति, लिंग, और दिव्यांगता शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ‘आदर्श जेल नियमावली 2016 के अनुसार सभी जिलों में ‘बोर्ड ऑफ विजिटर्स’ बनाने का आदेश दिया है। इस बोर्ड का प्रमुख संबंधित जिले का प्रधान जिला जज होगा। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने जेलों में जाति, लिंग, दिव्यांगता आदि के आधार पर भेदभाव से जुड़े एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ अधिसवक्ता डॉ. एस. मुरलीधर ने मामले में एक स्थिति रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट में कहा गया कि किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश ने अब तक बोर्ड आफ विजिटर्स का गठन नहीं किया है।
जबकि जेल नियमावली 2016 के प्रावधानों के मुताबिक बाहरी तौर पर जेलों की निगरानी के मुख्य तंत्र के रूप में हर जिले और सब-डिविजनल जेल में बोर्ड का गठन किया जाना जरूरी है। रिपोर्ट में कहा गया कि शीर्ष अदालत द्वारा शुकन्या शांता मामले में पारित फैसले में निर्देश दिया था कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण) और बोर्ड ऑफ विजिटर्स मिलकर जेलों का नियमित निरीक्षण करेंगे और यह पता लगाने का प्रयास करेंगे कि ‘क्या जेलों में अब भी जाति, लिंग, धर्म, दिव्यांगता के आधार पर कैदियों के साथ भेदभाव किया जाता है।प्रावधान के मुताबिक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और बोर्ड ऑफ विजिटर्स अपने निरीक्षण की संयुक्त रिपोर्ट राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को सौंपेंगे, जो एक संयुक्त रिपोर्ट तैयार करके राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को देंगे। इसी रिपोर्ट पर विचार करते हुए सभी जिलों में बोर्ड आफ विजिटर्स बनाने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश की एक-एक प्रति जल्द से जल्द सभी राज्यों के प्रधान सचिव (गृह) और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल को उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई 10 सितंबर को होगी।


