‘आईआईटी छात्र की जांच को मेडिकल बोर्ड बनाए एम्स’
सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी खड़गपुर से आईआईटी रुड़की में दाखिला स्थानांतरित करने के लिए छात्र के स्वास्थ्य का मूल्यांकन करने का आदेश दिया है। छात्र का मानसिक स्वास्थ्य उपचार न मिलने के कारण ट्रांसफर की मांग की गई है। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड बनाने का निर्देश दिया है, जिसकी जांच के बाद मामले की सुनवाई 29 जुलाई को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एम्स नई दिल्ली को चिकित्सा आधार पर आईआईटी खड़गपुर से अपना दाखिला आईआईटी रुड़की स्थानांतरित करने की मांग करने वाले छात्र के स्वास्थ्य के स्थिति का मू्ल्यांकन करने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने एम्स के निदेशक को एक मेडिकल बोर्ड बनाने का निर्देश दिया है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और आर. महादेवन की पीठ ने छात्र की याचिका पर सुनवाई पूरे होने तक एक सीट खाली रखने का आईआईटी रुड़की को निर्देश दिया है। सीट खाली रखने का आदेश तब दिया, जब बताया गया कि 17 जुलाई दाखिले के लिए अंतिम तारीख है। अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाले याचिकाकर्ता ने मानसिक स्वास्थ्य इलाज के लिए आईआईटी खड़गपुर से रुड़की में अपना दाखिला स्थानांतरित करने की मांग की है। छात्र की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया कि वह अवसाद (डिप्रेशन) से जूझ रहा है और खड़गपुर में इसका इलाज/थेरेपी की सुविधाए उपलब्ध नहीं हैं।
मेडिकल बोर्ड का गठन
पीठ ने एम्स के निदेशक को मेडिकल बोर्ड बनाने का निर्देश दिया, जो याचिकाकर्ता की जांच करेगा और कोर्ट के सामने अपनी रिपोर्ट पेश करेगा। मामले की सुनवाई 29 जुलाई को होगी। पीठ ने याचिकाकर्ता छात्र को एम्स के मेडिकल बोर्ड के समक्ष 20 जुलाई को पेश होने का निर्देश दिया। कोर्ट ने माना कि मेडिकल जांच के लिए उसे खड़गपुर बुलाना सही नहीं होगा। याचिकाकर्ता आईआईटी खड़गपुर में आर्किटेक्चर का छात्र है और रुड़की में माइग्रेशन चाहता है। याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ से कहा कि उनके मुवक्किल का इलाज अभी उसे चंडीगढ़ में मिल रहा है और वैसी ही थेरेपी सुविधाएं आईआईटी रुड़की में भी उपलब्ध हैं। साथ ही कहा गया कि थेरेपी नियमित होती है और शायद उसे जीवन भर इसकी जरूरत पड़ सकती है।
क्लोजिंग रैंक की प्रासंगिकता पर सवाल उठाया
आईआईटी की ओर से पेश अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि संस्थान को छात्र की स्थिति के प्रति ‘पूरी सहानुभूति’ है, लेकिन आईआईटी खड़गपुर और आईआईटी रुड़की के करिकुलम और कोर्स की समानता में अंतर है। पीठ को यह भी बताया गया कि रुड़की में दाखिले के लिए क्लोजिंग रैंक काफी अधिक थी और ट्रांसफर की अनुमति देने से एक गलत मिसाल कायम हो सकती है। हालांकि, जस्टिस नागरत्ना ने ट्रांसफर के संदर्भ में क्लोजिंग रैंक की प्रासंगिकता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि खड़गपुर में सीट मिली। वही मेरिट ट्रांसफर होनी चाहिए। साथ ही कहा कि याचिकाकर्ता ने मेरिट के आधार पर आईआईटी में दाखिला लिया था और केवल मेडिकल आधार पर माइग्रेशन चाहता है।


