सीएसई 2025 से ही क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट फैसला लागू करने के मुद्दे पर नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें ओबीसी क्रीमी-लेयर मानदंडों के लागू होने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। केंद्र ने कहा है कि इसकी व्यावहारिक दिक्कतें हैं, जबकि अदालत ने सुनवाई और जवाब दाखिल करने की तारीख तय की है।

नई दिल्ली विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार की उस याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2025 के उम्मीदवारों पर ओबीसी क्रीमी-लेयर मानदंडों के बारे में 11 मार्च के फैसले के लागू होने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि 11 मार्च 2026 को पारित फैसले को लागू करने में व्यावहारिक दिक्कतें हैं, क्योंकि उम्मीदवार अपनी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं और इससे वे प्रभावित होंगे।
याचिका पर सुनवाई
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आर महादेवन की पीठ ने केंद्र की याचिका पर नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों को 17 सितंबर तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इससे पहले, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि 11 मार्च, 2026 के फैसले को लागू करने में व्यावहारिक दिक्कतें हैं क्योंकि उम्मीदवार अपनी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं और इससे वे प्रभावित होंगे। वहीं, दूसरी तरफ कुछ मूल याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े और पी विल्सन ने केंद्र सरकार की ओर से दाखिल याचिका की स्वीकार्यता पर उन्हें शुरुआती आपत्ति जताई। वरिष्ठ अधिवक्ता हेगड़े ने पीठ से कहा कि केंद्र ने फैसले पर स्पष्टीकरण के लिए एक विविध आवेदन दायर किया है, न कि समीक्षा याचिका। इस पर सॉलिसिटर जनरल मेहता ने पीठ से कहा कि उनके पक्ष में कई फैसले हैं और अगर विरोधी पक्ष स्वीकार्यता का मुद्दा उठाते हैं, तो वे उस पर अपनी बात रख सकते हैं। इसके बाद पीठ ने मामले में नोटिस जारी कर सुनवाई 17 सितंबर तय कर दी।
केंद्र सरकार की स्थिति
इस मामले में 25 अगस्त को, शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह 11 मार्च के फैसले के लागू होने के बारे में स्पष्टीकरण के लिए केंद्र की याचिका पर सुनवाई के लिए एक विशेष बेंच का गठन करेगी। भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने सरकार को सीएसई -2025 के लिए यूपीएससी द्वारा अनुशंसित 958 उम्मीदवारों के सेवा आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति देने के लिए निर्देश मांगे हैं। यह प्रक्रिया 11 मार्च के फैसले से पहले लागू ओबीसी क्रीमी-लेयर निर्धारण के आधार पर की जानी है।
अदालत का निर्णय
डीओपीटी ने यह याचिका ‘यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाथन’ मामले में शीर्ष अदालत के फैसले से जुड़ी है। इस मामले में अदालत ने 11 मार्च को अन्य बातों के अलावा यह कहा था कि ‘14 अक्टूबर 2004 का स्पष्टीकरण पत्र, ओबीसी क्रीमी-लेयर की पहचान से संबंधित 8 सितंबर 1993 के ऑफिस मेमोरेंडम (कार्यालय ज्ञापन) से ऊपर नहीं हो सकता। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा था कि सार्वजनिक उपक्रम या निजी क्षेत्र में काम करने वाले माता-पिता की सैलरी या आय को अकेले क्रीमी-लेयर से बाहर रखने का निर्णायक मानदंड नहीं माना जा सकता। माता-पिता के पद और कैटेगरी के साथ-साथ तय इनकम/वेल्थ टेस्ट पर 1993 के ऑफिस मेमोरेंडम के अनुसार विचार किया जाना था।’
केंद्र के विचार
केंद्र सरकार ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने के लिए बाध्य है, लेकिन सीएसई -2025 पर इस फैसले को बिना सोचे-समझे लागू करने से उन कैंडिडेट्स के साथ भेदभाव हो सकता है जिनकी स्थिति एक जैसी थी, लेकिन परीक्षा के समय मौजूद कानूनी स्थिति के आधार पर उन्होंने अलग-अलग तरह से काम किया था।


