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राम राज्य में तो ऐसा नहीं होता था, विपक्षी दलों की किस हरकत से चिंतित हैं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज

उत्तर प्रदेश के अयोध्या राम मंदिर को लेकर जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा, 'उनका जन्मस्थान एक बार फिर हमारी सामूहिक सभ्यता का हिस्सा है। वह मर्यादा पुरुषोत्तम थे और उनके मूल्य आज भी प्रासंगिक हैं।

राम राज्य में तो ऐसा नहीं होता था, विपक्षी दलों की किस हरकत से चिंतित हैं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज
Nisarg Dixitलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 03 May 2024 12:17 PM
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सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC के अध्यक्ष जस्टिस अरुण मिश्रा ने संसद के मौजूदा हाल पर चिंता जाहिर की है। गुरुवार को जस्टिस मिश्रा Yearning for Ram Mandir and Fulfilment बुक लॉन्च में पहुंचे थे। उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर को लेकर उन्होंने कहा कि प्रभु लौट आए हैं और उन्हें सही स्थान पर स्थापित कर दिया गया है।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, NHRC के अध्यक्ष का कहना है, 'राम राज्य में राम दरबार में मुद्दों पर चर्चा हुआ करती थी। अब विपक्षी दलों की तरफ से संसद में बिलों पर कोई चर्चा नहीं होती है।'

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस मिश्रा ने कहा, 'आज के समय में हम देख रहे हैं कि संसद काम नहीं कर रही है। बिल बगैर चर्चा के पास हो रहे हैं। ऐसा राम राज्य में नहीं होता था।' उन्होंने कहा कि राम राज्य धर्म या गरीब और अमीर में फर्क नहीं करता था। उन्होंने कहा, 'हमारे संविधान का लक्ष्य राम राज्य को बनाए रखना है।'

उन्होंने आगे कहा, 'इसलिए, यह सभी धर्मों की चिंता करता है और सभी के लिए न्याय की मांग करता है। राम राज्य का मतलब सभी के लिए विकास और समानता है। यह गरीब और अमीर में फर्क नहीं करता है।' मंदिर को लेकर उन्होंने कहा, 'उनका जन्मस्थान एक बार फिर हमारी सामूहिक सभ्यता का हिस्सा है। वह मर्यादा पुरुषोत्तम थे और उनके मूल्य आज भी प्रासंगिक हैं। कोई भी इतना प्रेरक नहीं है।'

उन्होंने कहा, 'आज कल हम जाति में बंटे हुए हैं। भगवान राम जाति रहित समाज में भरोसा करते थे।' उन्होंने यह भी कहा, 'हमें मानवाधिकार के रक्षक राम की तरह बनना चाहिए और उनकी तरह जीना चाहिए। सनातन धर्म में सभी धर्मों को समाहित करने की ताकत है। यह उसकी ताकत है कमजोरी नहीं। हमारा संविधान राम राज्य के इन मूल्यों की रक्षा करता है।'