पर्यावरण कोष इस्तेमाल नहीं करने पर मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 1,000 करोड़ रुपये के पर्यावरण राहत कोष के उपयोग न होने पर नोटिस जारी किया। यह आदेश जबलपुर के पर्यावरण कार्यकर्ता की जनहित याचिका पर आया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि यह निधि सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए इस्तेमाल की जानी चाहिए थी।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के पर्यावरण राहत कोष का इस्तेमाल नहीं किए जाने पर केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने एक जनहित याचिका पर विचार करते यह आदेश दिया है, जिसमें रकम का इस्तेमाल नहीं करने और पर्यावरण के प्रति उदासीनता दिखाने का आरोप लगाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने जबलपुर के पर्यावरण कार्यकर्ता ज्ञान प्रकाश की याचिका पर सुनवाई की। याचिका में आरोप लगाया कि पर्यावरण राहत कोष, जो इस्तेमाल नहीं हुआ, उसका इस्तेमाल सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए किया जाना चाहिए था।
याचिकाकर्ता के प्रयास की तारीफ करते हुए, पीठ ने कहा कि 2019 की जनहित याचिका पर्यावरण राहत कोष के कथित तौर पर इस्तेमाल न करने का जिक्र था, जो मोटर व्हीकल एक्ट के सेक्शन 146 और पब्लिक लायबिलिटी इंश्योरेंस एक्ट, 1991 के तहत लगाया और इकट्ठा किया गया लगता है। पीठ ने केंद्र सरकार की दलील को रिकॉर्ड करते हुए कहा कि उसे बताया गया है कि 2020 तक कुल 881 करोड़ रुपये इकट्ठा किए गए थे और बाद में यह रकम बढ़कर 1,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। याचिकाकर्ता कहा कि पर्यावरण राहत कोष 2008 में बनाई गई थी, लेकिन स्कीम के तहत कोई रकम नहीं दी गई।


