निजी मंदिरों की निलामी संबंधी याचिका पर केंद्र, राज्य को नोटिस

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने निजी मंदिरों को राज्य सरकारों द्वारा नीलामी किए जाने के खिलाफ याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उनके मंदिरों को सरकारी सर्कुलर के तहत नीलाम किया जा रहा है। उन्होंने स्वतंत्र प्राधिकार या ट्रिब्यूनल की मांग की है।

निजी मंदिरों की निलामी संबंधी याचिका पर केंद्र, राज्य को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निजी जमीन पर बने मंदिरों को राज्य सरकारों द्वारा नीलामी किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। शीर्ष अदालत ने 237 पुश्तैनी पुजारियों और निजी मंदिरों के मालिकों की ओर से दाखिल एक रिट याचिका पर यह आदेश दिया। पुजारियों ने आरोप लगाया कि निजी जमीन पर बने उनके मंदिरों को सरकार नीलाम कर रही है। जस्टिस अरविंद कुमार और आलोक अराधे की पीठ ने मामले में केंद्र सरकार के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकार को भी नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ताओं (जो मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में निजी मंदिरों के पुश्तैनी पुजारी और मालिक हैं) के अनुसार, उनके मंदिर उनके पूर्वजों ने बनवाए थे और वे हमेशा से निजी मंदिर ही रहे हैं। हालांकि, ऐसे सरकारी सर्कुलर जारी किए गए जिनमें कलेक्टरों को मैनेजर नियुक्त किया गया। सुनवाई के दौरान जस्टिस कुमार ने याचिकाकर्ताओं से सवाल किया कि यदि 1974 के सर्कुलर के तहत जिला कलेक्टरों के नाम दर्ज किए गए थे, तो वे 60 साल तक क्या कर रहे थे? इसके जवाब में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि कलेक्टरों के नाम तो बहुत पहले ही दर्ज कर दिए गए थे, लेकिन अब अधिकारी उस जमीन की नीलामी करने की कोशिश कर रहे हैं।

पुजारी संपत्तियों को इधर-उधर कर रहे

इस पर जस्टिस कुमार ने कहा कि आप जानते हैं कि ये पुजारी क्या कर रहे हैं? वे संपत्तियों को इधर-उधर कर रहे हैं। इसीलिए ऐसा हो रहा है। हमारे सामने ऐसे बहुत सारे मामले आते हैं। असल में, जमीन देवता की होती है। जस्टिस कुमार ने इस याचिका पर सुनवाई करने में हिचकिचाहट दिखाते हुए कहा कि इसके लिए एकमात्र उपाय सिविल केस करना ही हो सकता है।

सरकार की जबरदस्ती वाली कार्रवाई रोकने की मांग

पुजारियों की ओर से शीर्ष अदालत से अनुरोध किया है कि वह एक स्वतंत्र प्राधिकार या ट्रिब्यूनल गठित कर दे जो यह तय करे कि संबंधित मंदिर निजी हैं या सार्वजनिक। याचिका में अदालत से रेवेन्यू रिकॉर्ड में देवता के साथ-साथ याचिकाकर्ताओं के नाम मालिक और वंशानुगत पुजारी के तौर पर फिर से दर्ज करने की भी मांग की है। साथ ही, सरकारों/सक्षम प्राधिकारों को मंदिर की संपत्ति की नीलामी, उसे गिराने या उसमें दखल देने जैसी कोई भी जबरदस्ती वाली कार्रवाई करने से रोक लगाने की मांग की।

पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने किस विषय पर नोटिस जारी किया?
सुप्रीम कोर्ट ने निजी जमीन पर बने मंदिरों को राज्य सरकारों द्वारा नीलामी किए जाने के खिलाफ नोटिस जारी किया।

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