आवारा पशुओं से होने वाले हादसों में पीड़ितों को मुआवजा देने का तंत्र विकसित करे सरकार- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा पशुओं के चलते सड़क हादसों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को कानूनों को कठोरता से लागू करने का आदेश दिया। अदालत ने दुर्घटनाओं को रोकने और पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए व्यापक तंत्र विकसित करने की सलाह दी।

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता आवारा पशुओं के चलते होने वाले सड़क हादसों की बढ़ती संख्या पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गंभीर चिंता जाहिर करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को मौजूदा कानूनों को और मजबूती से लागू करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि सड़कों, राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे पर घूमने वाले आवारा पशु इंसान और जानवर दोनों की जान के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं, ऐसे में इस पर रोक लगाने के लिए न सिर्फ कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है बल्कि व्यापक और समुचित कदम भी उठाने होंगे。
नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन का निर्देश
जस्टिस संजय करोल और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इसे गंभीरता से लेते हुए केंद्र और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को आवारा पशुओं के चलते होने वाले सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए एक व्यापक तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में एक आवारा सांड के हमले में एक व्यक्ति की मौत के मामले से जुड़ी अपील पर फैसला सुनाते हुए यह आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘ये नैचुरल स्पीड ब्रेकर नहीं हैं, जिन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग, सड़कों और गलियों में बिना सोचे-समझे लगा दिया जाए।’ पीठ ने कहा कि आवारा पशुओं की वजह से ऐसी घटनाएं पूरे देशभर में आम हैं और अधिकारिक आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले कुछ सालों में जानवरों के हमलों की वजह से हर साल 1,300 से अधिक मौतें हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह काफी गंभीर है और इस मुद्दे पर सरकारों को मिलकर नीति बनाने की जरूरत है, न कि इसे अलग-अलग घटनाओं के तौर पर देखा जाए।
पशु कल्याण और कानूनी ढाँचा
शीर्ष अदालत ने कहा कि ‘हमने पशुओं की भलाई से जुड़े संवैधानिक और कानूनी फ्रेमवर्क की अच्छी तरह से जांच की, जिसमें अनुच्छेद 48, अनुच्छेद 51ए (जी), जानवरों पर क्रूरता की रोकथाम एक्ट, 1960, कैटल ट्रेसपास एक्ट, 1871 और मवेशियों की सुरक्षा, गौशालाओं और जानवरों के शेल्टर से जुड़े अलग-अलग राज्य कानून शामिल हैं। पीठ ने कहा कि हमने पाया कि कई राज्यों ने आवारा मवेशियों को रेगुलेट करने और शेल्टर बनाने के लिए कानून बनाए हैं, लेकिन उन्हें असरदार तरीके से लागू करना अभी भी एक चुनौती है। पीठ ने फैसले की एक कॉपी सभी राज्यों के मुख्य सचिवों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक और राज्य विधिक सेवा प्राधिक सदस्य सचिव को उसकी सिफारिशों पर सही कार्रवाई के लिए भेजी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने 2007 में सांड के हमले में पंजाब के संगरूर में मारे गए वजय कुमार की पत्नी निशा की अपील स्वीकार करते हुए दिया है। पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द करते हुए अपीलकर्ता निशा को 15 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
आवारा मवेशियों की समस्या के कारण
आर्थिक रूप से उपयोगी नहीं होने के चलते लोग आवारा छोड़ दे रहे हैं मवेशी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवारा मवेशियों की बढ़ती समस्या के मुख्य कारणों में से एक के तौर पर मवेशियों को उनके आर्थिक रूप से उपयोगी न रहने के बाद छोड़ देना सबसे प्रमुख कारण है। पीठ ने कहा कि किसी खास मकसद के लिए पाले गए जानवरों को अक्सर उनकी प्रोडक्टिविटी कम होने पर खुला छोड़ दिया जाता है और आखिर में वे सड़कों और हाईवे पर आ जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई किसान और डेयरी मालिक अपने सभी जानवरों को चारा खिलाने के लिए संघर्ष करते हैं, इसलिए जो लोग जानवर पालना चुनते हैं, उनकी जिम्मेदारी है कि वे जीवन भर उनकी देखभाल करें और यह पक्का करें कि छोड़े गए या बीमार मवेशियों को खुले में घूमने के बजाय ऑथराइज़्ड शेल्टर में ट्रांसफर किया जाए।
पीठ ने कहा कि ‘बहुत अधिक खराब, इंसानी दुनिया’ में, मवेशियों को इस्तेमाल कम होने के बाद उन्हें आवारा छोड़ दिया जाता है, जबकि समाज को यह बुरा लगता है जब उन्हें खाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है और इसी उलझन को मौजूदा समस्या की वजह बताया।
सरकारों को सुझाए गए उपाय
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को सुझाए उपाय
- सभी राज्य जिन्होंने मवेशियों से जुड़े अपने कानून बनाए हैं, उन्हें यह इसके प्रभावी अनुपालन पक्का करने के लिए समुचित कदम उठाने चाहिए।
- जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं या नियम बनाए जा सकते हैं, जैसा कि सक्षम अधिकारी को सही लगे, ताकि दोनों तरह के मामलों में, यानी पैदल चलने वाले या गाड़ियों से होने वाले, मवेशियों की वजह से होने वाले एक्सीडेंट में मुआवजे के भुगतान का एक सिस्टम बनाया जा सके।
- सभी जानवरों की टैगिंग को अनिवार्य बनाने को कहा ताकि उन पर नजर रखने की क्षमता बढ़ेगी, जिससे उनकी लंबे समय तक हेल्थ सर्विस पक्की होगी और जानवरों के चेक-अप और वैक्सीनेशन से जुड़ा होगा।
- बीमार और अनउपयोगी पशुओं को सरकारी/ प्राधिकारण द्वारा चलाए जा रहे शेल्टर में भेजने को कहा।
- यह सुनिश्चित करने के लिए कि इन शेल्टर की टैगिंग, रिकॉर्ड का डिजिटाइज़ेशन और उन्हें ठीक से चलाया जा रहा है, अधिकारी हर कॉर्पोरेशन/डिपार्टमेंट में एक खास ऑफिसर तैनात कर सकते हैं जो इस काम के लिए नोडल ऑफिसर होगा।


