समय रैना समेत तीन पर तीन-तीन लाख का जुर्माना

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन समय रैना, यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया और आशीष चंचलानी पर जुर्माना लगाया है। न्यायालय ने कहा कि उन्होंने दिव्यांग व्यक्तियों को शो में आमंत्रित नहीं किया। इसके अलावा, रैना पर 'स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी' का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया गया है।

समय रैना समेत तीन पर तीन-तीन लाख का जुर्माना

कॉमेडियन समय रैना तथा यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया और आशीष चंचलानी के आचरण की कड़ी निंदा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने इस अदालत को गुमराह किया है इसलिए उन पर तीन-तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ ने यह आदेश तब दिया, जब उन्हें बताया गया कि रैना ने अपने शो में किसी भी दिव्यांग व्यक्ति को आमंत्रित नहीं किया, जैसा कि पिछले आदेश में उससे कहा गया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अपने मंच पर दिव्यांग लोगों को आमंत्रित कर सकते हैं, ताकि ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी’ (एसएमए) जैसी दुर्लभ बीमारियों से ग्रस्त पीड़ित मरीजों के समय पर इलाज के लिए धन जुटाने के उद्देश्य को बढ़ावा दिया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना समेत पांच ‘सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों’ को निर्देश दिया था कि वे दिव्यांग व्यक्तियों और दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाने के मामले में अपने पॉडकास्ट या शो में बिना किसी शर्त के माफी मांगे। खंडपीठ ने कहा कि हमें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि समय रैना ने अदालत को गुमराह किया है। उसने इस अदालत के सामने दिए गए बयानों/शपथ पत्रों का खुलेआम उल्लंघन किया है। सुप्रीम कोर्ट ‘क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन’ नामक संगठन की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें आरोप लगाया गया है कि समय रैना ने 'स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी' (एसएमए-मांसपेशी एवं तंत्रिका से जुड़ी आनुवंशिक बीमारी) के इलाज की अत्यधिक लागत को लेकर असंवेदनशील टिप्पणी की थी। याचिका में यह भी आरोप है कि उसने इस बीमारी से पीड़ित एक व्यक्ति का कथित तौर पर मजाक उड़ाया था।

हलफनामा दाखिल नहीं किया गया

वास्तव में कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया गया

पीठ ने कहा कि यह कहकर इस कदाचार पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है कि कल एक अनुपालन हलफनामा दाखिल किया गया था, जबकि वास्तव में कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) ने टिप्पणी की कि वे सोचते हैं कि देश से बाहर बैठकर वे (अदालत के) क्षेत्राधिकार से बाहर हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अब उन्हें भुगतने दीजिए। अगर यह अहंकार नहीं है, तो फिर हमें ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी (शब्दकोश) को ही बदलना पड़ेगा।

रैना का संगठन से संपर्क

रैना ने संगठन से कभी संपर्क नहीं किया

सुनवाई के दौरान संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने शीर्ष अदालत को बताया कि समय रैना ने अपने किसी भी शो में शामिल होने के लिए संगठन से कभी संपर्क नहीं किया तथा उनके (आरोपियों) द्वारा दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि वे मुझसे संपर्क नहीं कर पाये। उन्होंने कहा कि अब हमें उनसे उनके शो के लिए अनुरोध करना भी अप्रिय लग रहा है। उन्होंने कथित तौर पर कुछ स्थानों पर दिव्यांग लोगों के साथ शो किए हैं और कार्यक्रम आयोजित किए हैं।

युवाओं के आदर्श

‘देश युवाओं के पास रैना से अच्छे आदर्श हैं’

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि मुझे नहीं पता कि वह युवाओं के किस तरह के आदर्श हैं। जाहिर तौर पर समय रैना जैसे लोग युवाओं के आदर्श माने जाते हैं। यह सोचकर ही मुझे चिंता होती है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ''हमारे युवाओं के पास इससे बेहतर आदर्श (आइकन) हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना पर जुर्माना क्यों लगाया?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समय रैना ने अदालत को गुमराह किया है और दिव्यांग व्यक्ति को अपने शो में आमंत्रित नहीं किया।
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