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9 सितम्बर, 2020|11:42|IST

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कोर्ट की अवमानना मामले में सीनियर वकील प्रशांत भूषण दोषी करार, 20 अगस्त को सजा पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

Prashant Bhushan

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अदालत की अवमानना मामले में सीनियर वकील प्रशांत भूषण दोषी पाए गए हैं। न्यायपालिका के प्रति कथित रूप से दो अपमानजनक ट्वीट करने को लेकर अधिवक्ता प्रशांत भूषण के खिलाफ स्वत: शुरू की गई अवमानना कार्यवाही में आज सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने इस मामले में अधिवक्ता प्रशांत भूषण को दोषी करार दिया। अब सजा पर सुनवाई 20 अगस्त को होगी।

इससे पहले न्यायालय ने पांच अगस्त को इस मामले में सुनवाई पूरी करते हुए कहा था कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा। अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने उन दो ट्वीट का बचाव किया था, जिसमें अब कोर्ट ने मान लियाहै कि इससे अदालत की अवमानना की गई है। उन्होंने कहा था कि वे ट्वीट न्यायाधीशों के खिलाफ उनके व्यक्तिगत स्तर पर आचरण को लेकर थे और वे न्याय प्रशासन में बाधा उत्पन्न नहीं करते। न्यायालय ने इस मामले में प्रशांत भूषण को 22 जुलाई को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

पीठ ने सुनवाई पूरी करते हुए 22 जुलाई के आदेश को वापस लेने के लिए अलग से दायर आवेदन खारिज कर दिया था। इसी आदेश के तहत न्यायपालिका की कथित रूप से अवमानना करने वाले दो ट्वीट पर अवमानना कार्यवाही शुरू करते हुए नोटिस जारी किया गया था। पीठ सुनवाई के दौरान भूषण का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे के इस तर्क से सहमत नहीं थी कि अलग आवेदन में उस तरीके पर आपत्ति जताई है, जिसमें अवमानना प्रक्रिया अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल की राय लिए बिना शुरू की गई और उसे दूसरी पीठ के पास भेजा जाए।

भूषण ने व्यवस्था देने का अनुरोध किया था

भूषण ने उच्चतम न्यायालय के सेकेट्री जनरल द्वारा कथित तौर पर असंवैधानिक और गैर कानूनी तरीके से उनके खिलाफ दायर त्रुटिपूर्ण अवमानना याचिका स्वीकार करने पर भी व्यवस्था देने का अनुरोध किया था, जिसमें शुरुआत में याचिका प्रशासनिक पक्ष के पास रखी गई और बाद में न्यायिक पक्ष के पास। न्यायालय ने आदेश में कहा, ‘मामले में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता (दवे) को सुना। हमें इस रिट याचिका पर सुनवाई का आधार नहीं दिखता और इसलिए इसे खारिज किया जाता है। लंबित वादकालीन आवेदन खारिज माना जाए।’ 

दो ट्वीट संस्था के खिलाफ नहीं थे: दवे

दवे ने इसके बाद भूषण के खिलाफ दायर अवमानना मामले में बहस की और कहा, ‘दो ट्वीट संस्था के खिलाफ नहीं थे। वे न्यायाधीशों के खिलाफ उनकी व्यक्तिगत क्षमता के अंतर्गत निजी आचरण को लेकर थे। वे दुर्भावनापूर्ण नहीं हैं और न्याय के प्रशासन में बाधा नहीं डालते हैं।’ उन्होंने कहा था, ‘भूषण ने न्यायशास्त्र के विकास में बहुत बड़ा योगदान दिया है और कम से कम 50 निर्णयों का श्रेय उन्हें जाता है।’ दवे ने कहा कि अदालत ने टूजी, कोयला खदान आवंटन घोटाले और खनन मामले में उनके योगदान की सराहना की है।

एडीएम जबलपुर के मामले का संदर्भ दिया

उन्होंने कहा, ‘संभवत: आपने भी उनके 30 साल के कार्यों के लिए उन्हें पद्म विभूषण दिया होता। दवे ने यह भी कहा था कि कि यह मामला नहीं है जिसमें उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए।’ आपातकाल के दौरान मूल अधिकारों के स्थगित करने के एडीएम जबलपुर के मामले का संदर्भ देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि न्यायाधीशों के खिलाफ अत्यंत असहनीय टिप्पणी किए जाने के बावजूद अवमानना की कार्यवाही नहीं की गई। अपने 142 पन्नों के जवाब में भूषण ने अपने दो ट्वीट पर कायम रहते हुए कहा कि विचारों की अभिव्यक्ति, ‘हालांकि मुखर, असहमत या कुछ लोगों के प्रति असंगत होने की वजह से अदालत की अवमानना नहीं हो सकती। वहीं, शीर्ष अदालत ने भूषण के ट्वीट का संदर्भ देते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह आम लोगों की नजर में सामान्य तौर पर उच्चतम न्यायालय की संस्था और भारत के प्रधान न्यायाधीश की शुचिता और अधिकार को कमतर करने वाला है।

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  • Web Title:Supreme Court holds Prashant Bhushan guilty of contempt for tweets against court CJI SA Bobde