सुप्रीम कोर्ट ने हाथियों की सही देखभाल का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाथियों के साथ सम्मान और संवेदनशीलता से व्यवहार किया जाना चाहिए। अदालत ने बंदी हाथियों की उचित देखभाल और जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया और कहा कि वह धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं करेगी। केंद्र को विशेष सुविधाओं वाले क्लीनिक स्थापित करने का निर्देश दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि हाथियों के साथ ईश्वर के स्वरूप के रूप में सम्मान और संवेदनशीलता से व्यवहार किया जाना चाहिए। अदालत ने देशभर में बंदी हाथियों (पालतू हाथियों) की उचित देखभाल और नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। एक एनजीओ की ओर से दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने कहा कि अदालत मंदिरों में हाथियों को रखने के धार्मिक अधिकार या इसके पीछे की आस्था के सवाल में नहीं जाएगी।
हाथियों की उचित देखभाल
पीठ ने कहा कि उसका ध्यान केवल हाथियों की उचित देखभाल पर है। निजी लोगों, मंदिरों, वन विभागों, चिड़ियाघरों और पुनर्वास केंद्रों को कैद में रखे गए हाथियों के लिए बेहतर देखभाल के तरीके अपनाने चाहिए। पीठ ने कहा कि हम इस सवाल में नहीं जा रहे हैं कि कोई मंदिर हाथी रख सकता है या नहीं। हम किसी व्यक्तिगत या धार्मिक अधिकार के सवाल में भी नहीं जा रहे हैं। हमें धार्मिक अधिकारों और इस क्षेत्र में लागू अन्य कानूनों के बीच संतुलन बनाकर चलना है। ईश्वर के स्वरूप के प्रति जो सम्मान है, वह हाथियों के प्रति भी दिखाया जाना चाहिए।
केंद्र सरकार के निर्देश
पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह जरूरत के अनुसार अनिवार्य दिशा-निर्देश जारी करे और संबंधित राज्यों के साथ मिलकर हाथियों के लिए विशेष सुविधाओं वाले क्लीनिक स्थापित करने की प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था बनाए। हाथियों को नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए लेकर जाया जाए।


