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21 जनवरी, 2021|7:40|IST

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जज घूस कांड:SC में प्रशांत भूषण के NGO की याचिका खारिज, लगाया 25 लाख का जुर्माना

Prashant Bhushan

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मेडिकल काउंसिल ब्राइबरी केस में वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण के एनजीओ कैम्पेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटिबिलिटी एंड रिफॉर्म्स की तरफ से स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम द्वारा मामले की जांच कराए जाने वाली याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण के एनीजओ पर 25 लाख रुपए का जुर्माना भी लगा दिया। जस्टिस आरके अग्रवाल की अध्यक्षता में मामले की सुनवाई कर रही तीन जजों की पीठ ने जुर्माने की राशि सुप्रीम कोर्ट बार एसोशिएशन फंड में देने की बात कही।  

मामला मेडिकल कॉलेजों को मान्यता देने में हुए कथित भ्रष्टाचार का है। सीबीआई ने इस बारे में एक केस दर्ज कर रखा है। आरोप है कि मेडिकल कॉलेजों से जुड़े एक मामले का फैसला एक कॉलेज के हक में करवाने के लिए दलाल विश्वनाथ अग्रवाल ने पैसे लिए। याचिकाकर्ता की मांग थी कि मामले में सुप्रीम कोर्ट के जजों पर आरोप लग रहे हैं, इसलिए पूर्व चीफ जस्टिस की निगरानी में इस मामले की एसआईटी जांच होनी चाहिए।

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प्रशांत भूषण ने चीफ जस्टिस की भूमिका पर उठाए सवाल
प्रशांत भूषण का कहना था कि भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को इन मामलों पर कोई प्रशासनिक या न्यायिक निर्णय नहीं लेना चाहिए क्योंकि वे इस मामले में एक पक्ष हो सकते हैं। जस्टिस आरके अग्रवाल, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एएम खानविलकर की बेंच ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि ये मामला अपमानजनक है और ये अवमानना का केस बनता है, लेकिन कोर्ट अवमानना की कार्रवाई नहीं करेगा।

एक ही मामले पर 2 याचिका
प्रशांत भूषण के एनजीओ कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी एंड रिफॉर्म्स (सीजेएआर) की तरफ से मामले में याचिका दाखिल की गई। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपनी प्रशासनिक शक्ति का इस्तेमाल करते हुए इसे जस्टिस ए के सीकरी और अशोक भूषण की बेंच के पास भेज दिया। इसके अगले दिन एक और याचिका दाखिल कर दी गई। सीजेएआर की याचिका से बिल्कुल मिलती-जुलती याचिका में इस बार वकील कामिनी जायसवाल को याचिकाकर्ता बनाया गया। 

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  • Web Title:Supreme Court Dismisses Prashant Bhushan NgO CJAR Plea in Medical Admission scam Case and Imposed rs 25 lakh penalty