अध्यादेश के जरिए यूपी सरकार स्पष्ट करें कि एमवी एक्ट के तहत गैर समझौता योग्य अपराध कभी खत्म नहीं हुए- सुप्रीम

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को मोटर वाहन अधिनियम (एमवी एक्ट) 1988 के तहत गंभीर और गैर समझौता योग्य अपराधों के मामलों की समाप्ति पर निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि यूपी सरकार को अध्यादेश जारी करना चाहिए जिसमें यह स्पष्ट हो कि ऐसे मामले खत्म नहीं हुए हैं।

अध्यादेश के जरिए यूपी सरकार स्पष्ट करें कि एमवी एक्ट के तहत गैर समझौता योग्य अपराध कभी खत्म नहीं हुए- सुप्रीम

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को अध्यादेश के जरिए यह साफ करने के लिए कहा है कि मोटर वाहन अधिनियम (एमवी एक्ट) 1988 के तहत गंभीर और गैर समझौता योग्य (अनिवार्य जेल की सजा के प्रावधान या बार-बार होने वाले अपराध शामिल है) अपराध वाले मामले 2023 में कानून में किए गए संशोधन के तहत कभी खत्म नहीं किए गए थे। शीर्ष अदालत ने ‘उत्तर प्रदेश आपराधिक कानून (अपराधों का समझौता और मुकदमों की समाप्ति) अधिनियम, 2023’ की वैधानिकता को चुनौती देने वाले मामले से संबंधित एक अंतरिम अर्जी पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को यह निर्देश दिया। प्रदेश सरकार ने 2023 में लाए गए इस कानून के राज्य के 31 दिसंबर, 2021 तक लंबित मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत अपराधों के मुकदमों को खत्म करने का प्रस्ताव दिया था。

अधिवक्ता की आपत्ति

जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने यूपी सरकार द्वारा 2023 के कानून में प्रस्तावित संशोधन पर अपनी आपत्ति को दोहराते हुए कहा कि ‘इससे कानून को लेकर उठाई गई संवैधानिक चुनौती का समाधान नहीं होगा।’ शीर्ष अदालत ने पिछले साल नवंबर में 2023 के संशोधन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार से सवाल किया था। इसके बाद, यूपी सरकार ने पीठ को बताया था कि वह इस प्रावधान में संशोधन करने का प्रस्ताव कर रहा है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि ‘मोटरा वाहन अधिनियम के तहत गैर समझौता योग्य अपराध, अनिवार्य सजा वाले अपराध और बार-बार होने वाले अपराधों के मुकदमे खत्म नहीं होंगे।

संवैधानिक वैधता की जांच

वरिष्ठ अधिवक्ता अग्रवाल ने पीठ से कहाकि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन का कोई सार्थक उद्देश्य पूरा नहीं होगा जब तक कि राज्य के कानून की संवैधानिक वैधता की जांच न की जाए क्योंकि यह मोटर वाहन अपराधों को नियंत्रित करने वाले केंद्रीय कानून के साथ टकराव की स्थिति पैदा करता है। न्याय मित्र अग्रवाल ने पीठ से कहा कि यूपी सरकार को एक हलफनामा दायर किया था जिसमें कहा गया था कि उन मामलों की पहचान करने के लिए जिलों में समितियां गठित की गई हैं जिनमें अपराधों पर मुकदमा जारी रहेगा। उन्होंने पीठ से कहा कि ‘हमारे विचार से अदालत ऐसे संशोधन की संवैधानिकता की जांच कर सकते हैं क्योंकि केंद्रीय कानून कहता है कि गैर समझौता योग्य मामलों में मुकदमा चलाया जाएगा। सड़क सुरक्षा नागरिकों के लिए है और अगर कोई डर या रोक नहीं होगी, तो नागरिक नियमों का पालन नहीं करेंगे।’

सरकार का जवाब

इस पर यूपी सरकार ने पीठ से कहा कि ‘राज्य ने 2026 में एक अध्यादेश भी लाया था जिसमें स्पष्ट किया गया था कि अपराधों की तीन श्रेणियों के मुकदमों को खत्म नहीं किया जाएगा।’ इसके बाद पीठ ने सवाल किया कि उन मामलों का क्या होगा जिनमें कानून के तहत अपराध पहले ही खत्म माने जा चुके हैं। इस पर यूपी सरकार की ओर से पेश अधिववक्ता ने कहा कि ‘सरकार ऐसे मामलों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। प्रदेश के 75 जिलों में से 72 जिलों से जानकारी मिल चुकी है।’ इस पर जस्टिस पारदीवाला ने यूपी सरकार से कहा कि बेहतर होगा कि ‘राज्य सरकार एक और अध्यादेश जारी करे जिसमें यह साफ किया जाए कि जिन मामलों को पहले खत्म माना गया था, उनमें मुकदमे फिर से शुरू किए जाएंगे।’

संविधान की जांच की आवश्यकता

समाधान नहीं निकलता तो कानून की संवैधानिक वैधता की होगी जांच- जस्टिस पारदीवाला

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा ‘यदि राज्य ऐसे मामलों से निपटने का कोई समाधान निकालता है, तो इस अदालत को संशोधनों की संवैधानिक वैधता की जांच करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार समाधान नहीं निकालती है तो संशोधनों की संवैधानिकता की जांच करनी पड़ सकती है।’ शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार को साफ शब्दों में अध्यादेश जारी कर गैर समझौता योग्य अपराधी यानी ऐसे अपराधों जिनमें जेल की सजा अनिवार्य है, और बार-बार किए जाने वाले अपराधों के मामलों को फिर से शुरू करेंगे। अगर ऐसा अध्यादेश जारी किया जाता है, तो शायद हमें संवैधानिक वैधता के मामले में नहीं पड़ना पड़ेगा।’

जस्टिस केवी विश्वनाथन ने भी कहा कि यूपी सरकार से कहा कि अध्यादेश में यह साफ किया जाना चाहिए कि अपराधों को ‘कभी भी’ खत्म नहीं माना गया था। यह टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेा में

सामान्य प्रश्न

✦सुप्रीम कोर्ट ने मोटर वाहन अधिनियम पर यूपी सरकार को क्या निर्देश दिया?−
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को अध्यादेश जारी करने का निर्देश दिया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत गंभीर और गैर समझौता योग्य अपराध वाले मामले खत्म नहीं किए गए थे।
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