सड़क सुरक्षा: ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर के नियम का पालन सुनिश्चित करें केंद्र- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय को ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने के नियमों का पालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया। साथ ही, सभी सार्वजनिक सर्विस वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और इमरजेंसी बटन की अनिवार्यता के लिए स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से कहा कि वह ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने के नियम का ठीक से पालन सुनिश्चित करे। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सभी सार्वजनिक सर्विस वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और इमरजेंसी बटन अनिवार्य बनाने वाले पिछले आदेश के अनुपालन को लेकर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दे
जस्टिस जे बी पारदीवाला और के वी विश्वनाथन की पीठ ने सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया है। पीठ ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों (सीएमवीआर), 1989 के नियम 118 का जिक्र किया, जिसमें अधिसूचित ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने का प्रावधान है। पीठ ने इसी साल 13 मई को सड़क सुरक्षा नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग पर फैसला दिया था कि ‘सभी वाहन निर्माताओं की यह जिम्मेदारी है कि वे वाहन बनाने के दौरान ही स्पीड लिमिटिंग डिवाइस (एसएलडी/गति अवरोधक लगाएं। साथ ही केंद्र से कहा था कि वह परिवहन वाहनों की मैन्युफैक्चरिंग या डिलीवरी के समय एसएलडी लगाने के मुद्दे पर वाहन निर्माताओं के साथ बैठक करे।’ मामले की सुनवाई के दौरान मंगलवार को पीठ को बताया गया कि केंद्र सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे के मुताबिक इस संबंध में जून में एक बैठक हुई थी।
स्पीड गवर्नर पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
इस पर, सुप्रीम कोर्ट ने कहा ‘जहां तक स्पीड गवर्नर का सवाल है, हमारा मानना है कि नियम, खासकर केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 118, नोटिफाइड ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गर्वनर/गति अवरोधक उपकरण लगाना अनिवार्य बनाता है...’ पीठ ने कहा कि ऐसे में, हम सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से जोर देकर कहते हैं कि ऊपर बताए गए नियम 118 का प्रभावी तरीके से पालन सुनिश्चित कराए। पीठ ने यह भी कहा कि केंद्र के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह देखना जरूरी है कि जब कोई डीलर परिवहन वाहन बेचता है, तो यह सुनिश्चित करने के लिए कोई सिस्टम होना चाहिए कि उसमें गति अवरोधक/ स्पीड गवर्नर लगा हो। पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि वह पब्लिक सर्विस वाहनों में व्हीकल वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस पहले से लगाने के बारे में वाहन निर्माताओं के के साथ हुई बातचीत का ब्यौरा पेश करें। पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सीएमवीआर 1989 के नियम 125एच को लागू करने के संबंध में अनुपालक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा। इस नियम के तहत सभी पब्लिक सर्विस वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और इमरजेंसी बटन होना जरूरी है। शीर्ष अदालत ने 13 मई को मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि एक प्रतिशत से भी कम ट्रांसपोर्ट वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगी है। पीठ ने कहा था कि यह डिवाइस यात्रियों, खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा पक्की करेगी।
सड़क सुरक्षा सुधारों की आवश्यकता
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से दिल्ली हाईकोर्ट क्रॉसिंग के पास स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप लगाने पर निर्णय लेने को कहा है। शीर्ष अदालत ने कहा कि लाल बत्ती लगा देना समस्या का समाधान नहीं है। यह क्रॉसिंग राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) के पास भी है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एस. राजशेखरन की ओर से सड़क सुरक्षा सुधारों पर 2013 में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के पास पैदल यात्रियों के लिए क्रॉसिंग न होने पर चिंता जताई थी। शीर्ष अदालत ने सुरक्षा में एक गंभीर कमी की ओर इशारा किया, जिससे उन लोगों की जान को खतरा हो सकता है जो हर दिन बिना ट्रैफिक सिग्नल, फुट ओवरब्रिज या सुरक्षा के अन्य उपायों के इस व्यस्त रास्ते को पार करते हैं। मामले की सुनवाई के दौरान न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ अधिवक्ता व गौरव अग्रवाल ने पीठ को बताया गया कि हाईकोर्ट के पास क्रासिंग पर ट्रैफिक सिंग्नल /रेड लाइट चालू कर दी गई है। हालांकि उन्होंने पीठ से कहा कि वहां सिर्फ रेड लाइट होना काफी नहीं हो सकता क्योंकि हाईकोर्ट के कर्मचारियों और आम लोगों को हाईकोर्ट तक पहुंचने के लिए सड़क पार करनी पड़ती है। उन्होंने पीठ को सुझाव दिया कि सड़क पार करने वाले पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप्स लगाए जा सकते हैं, क्योंकि इससे वहां गाड़ियां धीमी हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि केंद्र वहां गाड़ियों की आवाजाही और पैदल यात्रियों के आने-जाने की जांच करने और सुधार के उपाय सुझाने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बना सकता है।


