सीजेपी के मार्च पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
कोर्ट ने कहा- सभी पक्षों से जिम्मेदार आचरण की उम्मीद नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम

कोर्ट ने कहा- सभी पक्षों से जिम्मेदार आचरण की उम्मीद नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने पांच सितंबर को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उसे उम्मीद है कि सभी पक्ष शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में रहकर व्यवहार करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा, ‘कानूनी एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखें और यह बताएं कि क्या अवैध है और क्या अनुमति योग्य है। हम उम्मीद करते हैं कि वे इसी दायरे में काम करेंगे। दोनों पक्षों से हमारी अपेक्षा है कि वे एक-दूसरे का सम्मान करेंगे, उचित आचरण करेंगे और देश के कानून का पालन करेंगे।’
सीजेपी का प्रदर्शन आह्वान
सीजेपी ने दिल्ली में प्रदर्शन मार्च का आह्वान किया है। संगठन का आरोप है कि केंद्र सरकार ने परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ चलाए गए उसके 36 दिन के आंदोलन को समाप्त कराने के लिए 25 जुलाई को किए गए वादों को पूरा नहीं किया।
याचिकाकर्ता से कहा- जांच समिति के पास जाएं
दिल्ली पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारी राजेंद्र सिंह की ओर से दायर याचिका में अनुरोध किया गया है कि कोई भी मार्च या जुलूस तय सीमा से आगे केवल वैध अनुमति और संबंधित क्षेत्र में लागू नियमों के अनुसार ही निकाला जाए। कोर्ट ने कहा है कि वह वह अपनी याचिका उस जांच समिति के सामने रखें जिसका गठन कोर्ट ने नीट विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस हिंसा के आरोपों की जांच के लिए किया है। नोटिस जारी करते हुए कहा, ‘मामले को लंबित याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध किया जाए। इस पर 10 सितंबर को सुनवाई की जाएगी।’


