अरावली पहाड़ियों पर रिपोर्ट 30 नवंबर तक दे समिति : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति को रिपोर्ट दाखिल करने के लिए दिए गए छह माह के समय के अनुरोध को खारिज कर दिया। अदालत ने समिति को 30 नवंबर तक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया और साफ किया कि समय का और विस्तार नहीं दिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अरावली पर गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) को रिपोर्ट दाखिल करने के लिए छह माह का समय देने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने समिति को 30 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने साफ किया कि 30 नवंबर तक रिपोर्ट दाखिल नहीं किए जाने पर समिति का पुनर्गठन किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने समिति की उस मांग को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें रिपोर्ट दाखिल करने के लिए फरवरी, 2027 तक समय देने का आग्रह किया गया था।
मुख्य न्यायाधीश ने समिति को 30 नवंबर तक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए ‘दिन-रात’ काम करने का निर्देश दिया और साफ कर दिया कि आगे कोई समय नहीं बढ़ाया जाएगा। समिति ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए छह माह का वक्त देने की मांग करते हुए कहा था कि राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समुदायों सहित सभी संबंधित पक्षों की बात सुनने की जरूरत पर बल दिया था। सीजेआई ने ने कहा कि समिति ने असल में मेरे सेवानिवृत होने तक का समय मांगा है। मुख्य न्यायाधीश 9 फरवरी को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ से कहा कि एक अंतरिम रिपोर्ट पहले ही तैयार की जा चुकी है, लेकिन प्रभावित पक्षों की बात ठीक से सुनने के लिए और समय की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट अरावली की पहाड़ियों की परिभाषा और सीमा तय करने के लिए ‘स्वतः संज्ञान’ लेकर मामले की सुनवाई कर रही है।


