‘दिल्ली के रिहायशी इलाकों का बुला हाल, बच्चे खेल नहीं सकते, बुजुर्ग टहल नहीं सकते’
सुप्रीम कोर्ट ने सत्य निकेतन मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दिल्ली के रिहायशी इलाकों की स्थिति खराब है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार और नगर निगम से रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। इमारत गिरने की जॉज करने के लिए सुरक्षा ऑडिट भी आवश्यक है, जिसमें निर्माण नियमों का उल्लंघन देखा गया।

सत्य निकेतन मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा ‘दिल्ली के रिहायशी इलाकों का बुरा हाल है। बच्चे खेल नहीं सकते, बुज़ुर्ग टहल नहीं सकते। शीर्ष अदालत ने दिल्ली सरकार और नगर निगम को भवन निर्माण नियमों, और जमीन के इस्तेमाल से जुड़े नियमों के उल्लंघन और पिछले आदेशों के पालन पर की गई कार्रवाई के बारे में हलफनामा और रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए यह टिप्पणी की। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर. महादेवन की पीठ ने कहा ‘वह दिल्ली में जमीन के नियमों के खिलाफ इस्तेमाल को रोकने के लिए निर्देश जारी करने का प्रस्ताव पर रखती है। पीठ ने कहा कि दिल्ली के रिहायशी इलाकों का बुरा हाल है। बच्चे खेल नहीं सकते, बुजुर्ग टहल नहीं सकते। सत्य निकेतन में इमारत गिरने पर चिंता जताते हुए जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा वे उन्हें एक ही कमरे में सैकड़ों की संख्या में ठूंस देते हैं, जैसे सार्डिन मछली को डिब्बे में भरा जाता है। क्या वह ढांचा इतना भार सहने लायक है? न तो अंदर-बाहर जाने का कोई ठीक इंतजाम है, न ही कुछ और। उन्होंने यह टिप्पणी तब की, जब वरिष्ठ अधिवक्ता अजित कुमार सिन्हा ने जिम, कोचिंग सेंटर और बीपीओ का जिक्र करते हुए कहा कि इन जगहों पर भी नियमों के बड़े पैमाने पर उल्लंघन हो सकते हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में लड़कों के लिए पेइंग गेस्ट (पीजी) सुविधा वाली पांच मंजिला इमारत रविवार को गिर गई थी, जिसमें सात छात्रों की मौत हो गई और 12 लोग घायल हो गए।
सत्य निकेतन मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में ही होगी
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को साफ किया कि सत्य निकेतन में इमारत गिरने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही को अपने पास स्थानांतरित नहीं कर रहा है क्योंकि ‘मामले में कार्रवाई शुरू हो गई है।’ शीर्ष अदालत ने कहा कि वे मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं करना चाहते। पीठ ने इस मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अजित कुमार सिन्हा के सुझाव पर विचार करते हुए यह आदेश दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता सिन्हा ने पीठ से उन्हें अपने सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों से पता चला है कि नगर निकायों से अवैध निर्माण और पीजी आवासों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि मेरी राय में, अगर हाईकोर्ट से मामला स्थानांतरित किया गया, तो सब कुछ रुक जाएगा। दिल्ली सरकार और नगर निगम की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी मामला सुप्रीम कोर्ट स्थानांतरित नहीं करने का आग्रह किया।
राजधानी के इन इलाकों में भी निर्देश जारी करने का आग्रह
वरिष्ठ अधिवक्ता अजित सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट से राजधानी में लाजपत नगर, मालवीय नगर और साकेत जैसे इलाकों में कोर्ट द्वारा पहले से पहचाने गए इलाकों से बाहर भी निरीक्षण करने की अनुमति देने के संबंध में जरूरी निर्देश जारी करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए जा सकते हैं कि वे दिल्ली भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास स्थित पीजी आवासों, निजी हॉस्टलों और छात्रों के रहने की ऐसी ही अन्य जगहों का तय समय सीमा के भीतर निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट करें।
रिपोर्ट दाखिल
भवनों का सुरक्षा ऑडिट में इन चीजों की जांच होनी चाहिए : न्याय मित्र
- मंजूर किए गए बिल्डिंग प्लान
- असल निर्माण और मंजिलों की संख्या
- बेसमेंट का निर्माण और उसमें किए गए बदलाव
- जमीन के इस्तेमाल की मंज़ूरी
स्ट्रक्चरल सुरक्षा
- आग से सुरक्षा के नियमों का पालन
- आने-जाने के रास्ते और किसी भी खतरनाक या जर्जर स्थिति का होना।


