करूर भगदड़ मामले में कैविएट दाखिल
हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
तमिलनाडु के करूर में भगदड़ में मृतकों के परिजनों को नौकरी देने के मद्रास हाईकोर्ट के निर्णय की चुनौती दिए जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने कहा कि सरकारी नौकरी में समान अवसर का उल्लंघन होता है, जो संविधान के अनुच्छेद-14 और 16 के खिलाफ है।

तमिलनाडु के करूर में मची भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने के मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के आदेश को चुनौती देने वाली अपील के सिलसिले में, ‘मनिथनेया जननायगा काची’ (एमजेके) के राज्य उप-सचिव सीनी अहमद की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट याचिका दायर की गई है। मद्रास हाईकोर्ट ने 27 जुलाई को भगदड़ पीड़ितों के परिजनों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि यह कदम संविधान के अनुच्छेद-14 और 16 का उल्लंघन करता है, जो कानून के समक्ष समानता और सरकारी नौकरी में समान अवसर की गारंटी देते हैं।
कोर्ट ने यह टिप्पणी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें मुख्यमंत्री विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (टीवीके) के नेतृत्व वाली नई सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी।


