सीजेआई ने मध्यस्थता परिषद बनाने में देरी पर चिंता जताई
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, सूर्यकांत ने आर्बिट्रेशन काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्माण में हो रही देरी पर चिंता जताई। उन्होंने बुनियादी बदलावों की जरूरत बताई और कहा कि संबंधित संस्थाओं को खुद नियम बनाने चाहिए। उन्होंने 'सार्वजनिक रजिस्टर' का प्रस्ताव भी रखा, ताकि मध्यस्थता की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ सके।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने देश में आर्बिट्रेशन काउंसिल ऑफ इंडिया के गठन में हो रही देरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत की मध्यस्थता व्यवस्था में बुनियादी बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने आगे कहा कि इस क्षेत्र से जुड़े संस्थानों व विशेषज्ञों को सरकार का इंतजार करने के बजाय खुद बेहतर नियम और मानक बनाने चाहिए। मुंबई सेंटर फॉर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन द्वारा आयोजित ‘इंडिया एडीआर वीक वीक 2026’ में बोलते हुए सीजेआई ने मध्यस्थों के लिए सभी संस्थाओं में मान्य एक ‘सार्वजनिक रजिस्टर' बनाने का प्रस्ताव रखा, जिसमें उसके बारे में जानकारी हो। उन्होंने कहा कि मैं एक ऐसी बात बताना चाहता हूं जो शायद सुनने में अच्छी न लगे।
मध्यस्थता के लिए एक नेशनल रेगुलेटरी बॉडी, यानी 'आर्बिट्रेशन काउंसिल ऑफ़ इंडिया' बनाने वाला कानून 2019 में पास हुआ था। अब छह साल से ज्यादा हो चुके हैं, और वह काउंसिल अभी तक बनी ही नहीं है। मैं यह बात किसी को शर्मिंदा करने के लिए नहीं कह रहा हूं। मुझे पता है कि सरकार एक नए मध्यस्थता विधेयक पर काम कर रही है जो इस संस्था को पूरी तरह बदल सकता है।


