सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु धोखाधड़ी मामले की कार्यवाही रद्द की
सुप्रीम कोर्ट ने चेन्नई में धोखाधड़ी मामले की कार्यवाही रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि यह एक सिविल विवाद है और शिकायतकर्ता ने इसे आपराधिक रूप दिया है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्जल भुईयां के पीठ ने कहा कि आपराधिक कार्यवाही का जारी रखना कानून का दुरुपयोग होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को चेन्नई में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले की कार्यवाही रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि आरोप पार्टियों के बीच पूरी तरह से सिविल विवाद की ओर इशारा करते हैं। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि मामले में शिकायतकर्ता ने पूरी तरह से सिविल विवाद को ‘आपराधिक रंग’ देने की कोशिश की है, और आपराधिक कार्यवाही को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का सरासर दुरुपयोग होगा। शीर्ष अदालत ने दो अपीलकर्ताओं द्वारा दायर अपील पर अपना फैसला सुनाया, जिन्होंने मद्रास हाईकोर्ट के मार्च 2025 के आदेश को चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि अपीलकर्ताओं पर अपराध करने का आरोप था, जिसमें पुराने आईपीसी की धाराओं के तहत दंडनीय अपराध शामिल थे।
शीर्ष अदालत के पिछले फैसले का हवाला देते हुए, पीठ ने कहा कि धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के अपराध एक ही तरह के आरोपों पर कायम नहीं रह सकते। पीठ ने कहा कि पार्टियों के बीच विवाद मूल रूप से सिविल प्रकृति का था। पीठ ने कहा कि हमारा मानना है कि शिकायतकर्ता द्वारा आरोपी के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का सरासर दुरुपयोग होगा।


