‘हिमाचल के विधायक मेयर, डिप्टी मेयर चुनाव में मतदान कर सकेंगे’
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव में विधायकों को मतदान करने की अनुमति दी है। यह आदेश हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश पर रोक लगाते हुए दिया गया। अब राज्य में नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में विधायकों को वोट देने का अधिकार होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों के मेयर, डिप्टी मेयर, चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन के चुनाव में मतदान करने की विधायकों को इजाजत दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद, अब राज्य भर की नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में पदाधिकारियों के चुनाव में विधायकों को हिस्सा लेने और वोट देने की इजाजत होगी।
अधिवक्ता जनरल की प्रतिक्रिया
हिमाचल प्रदेश के एडवोकेट जनरल अनूप कुमार रतन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सिर्फ सरकार के लिए राहत नहीं है, बल्कि कानून की सही व्याख्या की पुष्टि भी है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश म्युनिसिपल एक्ट, 1994 की धारा 10(3) विधायकों को म्युनिसिपल निकायों के पदेन सदस्य के तौर पर वोट देने का अधिकार देती है और विधानसभा ने सोच-समझकर इस अधिकार को किसी खास तरह की बैठकों तक सीमित नहीं किया था।
कानूनी स्थिति स्पष्ट
सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि जब तक हिमाचल प्रदेश म्युनिसिपल एक्ट की धारा 10(3) को रद्द या अमान्य घोषित नहीं किया जाता, तब तक विधायकों के पास वोट देने का कानूनी अधिकार बना रहेगा। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश पर रोक लगने से स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर बनी अनिश्चितता खत्म हो गई है और कानूनी स्थिति स्पष्ट हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के 4 जून के आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें ऐसे चुनावों में मतदान को सिर्फ चुने हुए वार्ड पार्षद तक सीमित कर दिया गया था। राज्य सरकार ने अंतरिम आदेश को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि इससे शहरी लोकल बॉडीज़ के लिए चल रहे चुनाव प्रक्रिया में अनिश्चितता और मुश्किलें पैदा हो गई हैं।
सामान्य प्रश्न
कृपया अपने अनुभव को रेट करें


