मछुआरों को तमिलनाडु की ईईजेड में मछली पकड़ने की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को कहा कि मछुआरों को समुद्री सीमा के बाहर 'पर्स सीन' मछली पकड़ने की इजाजत दी जा सकती है, बशर्ते इसे उचित अनुमति के साथ किया जाए। कोर्ट ने राज्य के नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का भी उल्लेख किया। यह निर्णय एनजीओ 'फिशरमेन केयर' की याचिका पर आया है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु सरकार से कहा कि मछुआरों को राज्य की समुद्री सीमा के बाहर ‘पर्स सीन’ मछली पकड़ने की इजाजत दी जा सकती है, लेकिन ऐसी कोई भी गतिविधि उचित अनुमति के साथ ‘एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन’ के दायरे में होनी चाहिए। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि अगर ‘पर्स सीन’ (मछली पकड़ने वाले मछुआरों का एक ऐसा तरीका है जिसमें खुले पानी में मछलियों के झुंड को घेरने के लिए नाव से जुड़े एक खड़े जाल का इस्तेमाल किया जाता है) राज्य की समुद्री सीमा के भीतर राज्य के नियमों का उल्लंघन करते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।
पीठ ने कहा कि हम राज्य या केंद्र के नियमों के उल्लंघन की इजाज़त नहीं देंगे, लेकिन साथ ही, राज्य को उन्हें ‘पर्स सीन’ मछली पकड़ने के लिए केंद्र के अधिकार क्षेत्र वाले ‘एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन’ में जाने से नहीं रोकना चाहिए, जो राज्य की 12 नॉटिकल मील की समुद्री सीमा से बाहर है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह एनजीओ ‘फिशरमैन केयर’ की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख रहा है। एनजीओ ने आरोप लगाया था कि राज्य न तो उन्हें अपने इलाके में मछली पकड़ने दे रहा है और न ही उन्हें अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर केंद्र के अधिकार क्षेत्र वाले ‘एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन’ में जाने दे रहा है।


