‘नागरिकता की पुष्टि होने तक विदेशी को वापस नहीं भेज सकते’
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि किसी विदेशी नागरिक को उसके देश की नागरिकता की पुष्टि और स्वीकृति के बिना वापस नहीं भेजा जा सकता है। यह हलफनामा राजुबाला दास की याचिका के जवाब में दाखिल किया गया है, जिसमें नागरिकता के बिना विदेशी घोषित लोगों से संबंधित मामले पर चर्चा की गई है।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि किसी विदेशी नागरिक को तब तक उसके देश वापस नहीं भेजा जा सकता है, जब तक कि उसका देश उसकी नागरिकता की पुष्टि न करें और उसे स्वीकार करने के लिए सहमत न हो। केंद्र सरकार ने कुछ लोगों की नागरिकता की पुष्टि किए बगैर ही विदेशी घोषित किए जाने के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिका के जवाब में सुप्रीम कोर्ट में इस बारे में हलफनामा दाखिल किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजुबाला दास की ओर से दाखिल याचिका के जवाब में यह हलफनामा दाखिल किया है। यह याचिका उन लोगों से जुड़ी है जिन्हें विदेशी घोषित किया गया है लेकिन जिनकी नागरिकता का पता नहीं है।
गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वापस भेजने से पहले नागरिकता की पुष्टि की प्रक्रिया के माध्यम से संबंधित देश के दूतावास/उच्चायोग से जरूरी यात्रा दस्तावेज प्राप्त करना जरूरी है। सरकार ने शीर्ष अदालत से कहा कि ऐसे मामलों में, संबंधित राज्य सरकार या फिर एफआरआरओ या एफआरओ विदेश मंत्रालय के साथ मामला उठा सकती है। केंद्र ने आगे कहा कि जब तक राष्ट्रीयता की पुष्टि नहीं हो जाती और डिपोर्टेशन (देश से बाहर भेजना) संभव नहीं है, तब तक ऐसे अवैध प्रवासियों की आवाजाही पर कानूनी रूप से रोक होनी चाहिए।


