आवारा पशुओं संबंधी कानून मजबूती से लागू करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा पशुओं के चलते होने वाले सड़क हादसों पर गंभीर चिंता जताई। केंद्र और राज्य सरकारों को कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन का आदेश दिया गया। कोर्ट ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में जानवरों के हमलों से हर साल 1,300 से अधिक मौतें हो रही हैं और मवेशियों को बेकार होने पर आवारा छोड़ देने की समस्या को भी रेखांकित किया।

आवारा पशुओं के चलते होने वाले सड़क हादसों की बढ़ती संख्या पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गंभीर चिंता जताई। शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को मौजूदा कानूनों को और मजबूती से लागू करने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि सड़कों, राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे पर आवारा पशु इंसान और जानवर दोनों के लिए गंभीर खतरा हैं। इस पर रोक लगाने के लिए कानून को प्रभावी तरीके से लागू करना होगा। जस्टिस संजय करोल और एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने केंद्र और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को आवारा पशुओं के चलते होने वाले सड़क हादसे रोकने और पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए एक व्यापक तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में एक आवारा सांड के हमले में एक व्यक्ति की मौत के मामले से जुड़ी अपील पर फैसला सुनाते हुए यह आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये नैचुरल स्पीड ब्रेकर नहीं हैं, जिन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग, सड़कों और गलियों में बिना सोचे-समझे लगा दिया जाएं। पीठ ने कहा कि पिछले कुछ सालों में जानवरों के हमलों की वजह से हर साल 1,300 से अधिक मौतें हो रही है।
कानूनों का प्रभावी कार्यान्वयन
शीर्ष अदालत ने कहा कि हमने पशुओं की भलाई से जुड़े संवैधानिक और कानूनी फ्रेमवर्क की अच्छी तरह से जांच की। पीठ ने कहा कि हमने पाया कि कई राज्यों ने आवारा मवेशियों को नियंत्रित करने और शेल्टर बनाने के लिए कानून बनाए हैं, लेकिन उन्हें असरदार तरीके से लागू करना अभी भी एक चुनौती है। पीठ ने फैसले की एक कॉपी सभी राज्यों के मुख्य सचिवों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक और राज्य विधिक सेवा प्राधिक सदस्य सचिव को उसकी सिफारिशों पर सही कार्रवाई के लिए भेजी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने 2007 में सांड के हमले में पंजाब के संगरूर में मारे गए विजय कुमार की पत्नी निशा की अपील स्वीकार करते हुए दिया है। पीठ ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए अपीलकर्ता निशा को 15 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
आवारा मवेशियों की समस्या
बेकार होने पर लोग आवारा छोड़ देते हैं मवेशी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवारा मवेशियों की बढ़ती समस्या के मुख्य कारणों में से एक के तौर पर मवेशियों को उनके आर्थिक रूप से उपयोगी न रहने के बाद छोड़ देना सबसे प्रमुख कारण है। पीठ ने कहा कि किसी खास मकसद के लिए पाले गए जानवरों को अक्सर उनकी प्रोडक्टिविटी कम होने पर खुला छोड़ दिया जाता है और आखिर में वे सड़कों और हाईवे पर आ जाते हैं।
सुझाए गए उपाय
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को सुझाए उपाय
- सभी राज्य जिन्होंने मवेशियों से जुड़े कानून का प्रभावी अनुपालन पक्का करने के लिए समुचित कदम उठाने चाहिए।
- जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं या नियम बनाए जा सकते हैं, जैसा कि सक्षम अधिकारी को सही लगे।
- सभी जानवरों की टैगिंग को अनिवार्य बनाया जाए ताकि उन पर नजर रखने की क्षमता बढ़ेगी।
- बीमार और अनउपयोगी पशुओं को सरकारी/ प्राधिकारण द्वारा चलाए जा रहे शेल्टर में भेजा जाए।
- शेल्टर की टैगिंग, रिकॉर्ड का डिजिटलाइजेशन के लिए नोडल ऑफिसर होगा।


