लीची की उम्र 35 दिन बढ़ी, मैप तकनीक से मिली बड़ी सफलता
शोल्डर : लीची अनुसंधसान केंद्र ने मॉडिफाइड एटमॉस्फियर पैकेजिंग का किया परीक्षण उपलब्धि वैज्ञानिकों

मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र की तकनीक से लीची की शेल्फ लाइफ 35 दिनों तक बढ़ाने में वैज्ञानिकों को सफलता मिली है। बीते सात जून को राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने अपने केन्द्र के कोल्ड रूम में 10-10 किलो की पांच कार्टन चाइना लीची रखी थी, जिसे 35 दिन बाद सोमवार को निकाला गया। कार्टन में रखी लीची के ऊपर का 80 प्रतिशत रंग, आकार और मिठास सही पाया गया। हालांकि नीचे रखी 20 फीसदी लीची में फंगस लगा मिला।
राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र की तकनीक
राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र मुशहरी के निदेशक डॉ. बिकास दास ने बताया कि अनुसंधान केन्द्र द्वारा एक परामर्श परियोजना के अंतर्गत, नोएडा की कंपनी द्वारा विकसित मॉडिफाइड एटमॉस्फियर पैकेजिंग (मैप) का लीची की शेल्फ लाइफ बढ़ाने में सफल परीक्षण किया गया। अध्ययन के दौरान लीची तुड़ाई के तुरंत बाद 10 किलोग्राम क्षमता वाले मैप पैकेट में सामान्य तापमान पर दो दिन बाहर रखा गया। उसके बाद चार डिग्री सेल्सियस तापमान पर केंद्र के शीत भंडारण में रखा गया। परिणाम अत्यंत उत्साहजनक रहे। सामान्यत: दो से तीन दिन ही सुरक्षित रहने वाली लीची 35 दिनों तक विपणन योग्य अवस्था में सुरक्षित रही। सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि महज 55 रुपए के मैप पैकेट में अधिकतर फलों के छिलके का प्राकृतिक लाल रंग भी लंबे समय तक सुरक्षित बना रहा。
वैश्विक बाजार में लीची की संभावनाएँ
डॉ. बिकास दास ने बताया कि यह तकनीक फल कटाई उपरांत होने वाली क्षति को कम करने, दूरस्थ एवं निर्यात बाजारों तक उच्च गुणवत्ता वाली लीची पहुंचाने तथा किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आईसीएआर-राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र को विश्वास है कि यह तकनीक भविष्य में भारतीय लीची की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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