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हिंदी न्यूज़ देशसुभाष चंद्र बोस की राख लाने से खुफिया विभाग ने रोका, नेता जी के पड़पोते का दावा; दंगा होने की दी थी चेतावनी

सुभाष चंद्र बोस की राख लाने से खुफिया विभाग ने रोका, नेता जी के पड़पोते का दावा; दंगा होने की दी थी चेतावनी

लाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीNishant Nandan
Fri, 22 Oct 2021 08:28 PM
सुभाष चंद्र बोस की राख लाने से खुफिया विभाग ने रोका, नेता जी के पड़पोते का दावा; दंगा होने की दी थी चेतावनी

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पड़पोते ने दावा किया है कि नरसिम्हा राव सरकार नेताजी के राख को वापस लाना चाहती थी। लेकिन खुफिया विभाग ने उस वक्त दंगा की चेतावनी दी थी जिसके बाद राख को नहीं लाया जा सका। नेताजी के पड़पोते के मुताबिक साल 1990 में पी वी नरसिम्हा राव सरकार उस राख को भारत लाना चाहती थी जिसके बारे में कहा जा रहा था कि यह राख नेताजी सुभाष चंद्र बोस के हैं। यह राख जापान के मंदिर रेनकोजी में रखे गये थे। लेकिन खुफिया विभाग की एक रिपोर्ट के बाद उन्होंने अपने कदम पीछे खींच लिये। खुफिया विभाग ने उस वक्त चेतावनी दी थी कि इससे विवाद होगा और जिसकी वजह से दंगे हो सकते हैं। 

टोक्यो स्थिति एक बौद्ध मंदिर में सितंबर 1945 से रखे गए राख को लेकर ऑथर और रिसर्चर आशीष रॉय ने भी कहा था कि नेताजी के राख के कानूनी अधिकारी उनकी बेटी प्रोफेसर अनिता घोष के पास होना चाहिए। अनीता बोस जर्मनी में रहती है और भारत सरकार को उन्हें चार्ज लेने के लिए अनुमति देनी चाहिए। 

सुभाष चंद्र बोस द्वारा बनाए गए आजाद हिंद फौज की 78वीं वर्षगांठ के मौके पर एक सेमिनार को वर्चुअली संबोधित करते हुए रॉय ने अपनी बात रखी। रॉय ने सुभाष चंद्र बोस पर अहम अध्ययन किये और किताबें भी लिखी हैं। उनकी लिखी किताब 'Laid to Rest' में दावा किया गया है कि उस वक्त नरसिम्हा राव ने एक हाई लेवल कमेटी बनाई थी। इस कमेटी में प्रणब मुखर्जी को भी शामिल किया गया था। इस कमेटी की जिम्मेदारी राख को वापस लाने की थी। 

हालांकि, उस वक्त खुफिया विभाग ने एक अपनी एक रिपोर्ट जारी कर चेतावनी दी कि इस मुद्दे पर कोलकाता में दंगे भड़क सकते हैं। हालांकि, देश में कई लोग यह भी मानते हैं कि 18 अगस्त, 1945 को हुए प्लेन क्रैश में नेताजी की मौत नहीं हुई थी। नेताजी को लेकर कई थ्योरी है। कुछ लोगों का यह भी मानना हैं कि वो सोवियत के जेल में रहे तो कई लोगों का मानना है कि वो एक साधु बनए। 

सुभाष चंद्र बोस के रिश्तेदार प्रोफेसर सुगाता बोस भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे। उन्होंने कहा कि नेताजी की मौत को लेकर अलग-अलग थ्योरी अब बंद हो जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि नेताजी के अवशेष एक राष्ट्रीय मुददा है और यह पारिवारिक मुद्दा नहीं है।।
 

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