पूर्णिया: पेपर लीक एवं बदहाल शिक्षा व्यवस्था के विरोध में सांकेतिक भूख हड़ताल
पूर्णिया में छात्रों और युवाओं ने पेपर लीक के बढ़ते मामलों और खराब शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ एक दिवसीय भूख हड़ताल आयोजित की। 200 से अधिक प्रतिभागियों ने पारदर्शिता और सुधार की मांग करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएँ युवाओं के भविष्य को अनिश्चितता में डाल रही हैं। उन्होंने शिक्षा में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।

पूर्णिया से धीरज की रिपोर्ट देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों, बदहाल शिक्षा व्यवस्था तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर सोमवार को थाना चौक पर छात्रों एवं युवाओं द्वारा एक दिवसीय सांकेतिक भूख हड़ताल का आयोजन किया गया। यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं, बल्कि आम छात्रों और युवाओं की पहल पर आयोजित किया गया, जिसमें 200 से अधिक छात्र-युवा एवं नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखते हुए कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक ने लाखों युवाओं के भविष्य को अनिश्चितता के दौर में धकेल दिया है।
वर्षों की मेहनत, आर्थिक संसाधनों और मानसिक ऊर्जा लगाने के बाद जब परीक्षाएँ रद्द होती हैं या उनकी निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को उठाना पड़ता है। परीक्षा शुल्क, कोचिंग, अध्ययन सामग्री, यात्रा और रहने का खर्च उठाना उनके परिवारों के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ होता है। ऐसे में बार-बार पेपर लीक और परीक्षाओं के स्थगित होने से न केवल आर्थिक क्षति होती है, बल्कि युवाओं का मनोबल भी टूटता है। भूख हड़ताल के दौरान छात्रों और युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने, पेपर लीक की घटनाओं पर त्वरित एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा दोषियों को सख्त दंड देने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषय किसी राजनीतिक विचारधारा का नहीं, बल्कि देश के भविष्य का प्रश्न हैं और इन पर सभी को गंभीरता से कार्य करना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न छात्रों एवं युवाओं ने अपने विचार रखे और कहा कि यह आंदोलन युवाओं के भविष्य की सुरक्षा और व्यवस्था में सुधार की सकारात्मक मांग के लिए आयोजित किया गया है। उन्होंने लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीकों से अपनी आवाज बुलंद करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।


