छात्र को नोटिस भेजने के मामले में पुलिसकर्मियों की विभागीय जांच शुरू
नोएडा, रवि प्रकाश सिंह रैकवार। सोशल मीडिया पर मामले ने पकड़ा तूल - प्रशासन ने जिलाधिकारी पर उठे सवालों

नोएडा, रवि प्रकाश सिंह रैकवार। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने वाले गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के छात्र अक्षत त्रिपाठी को पांच लाख रुपये के मुचलके का नोटिस जारी करने के मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। विवाद बढ़ने के बाद गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई में जिलाधिकारी की कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने छात्र के खिलाफ धारा-130 के तहत कोई आदेश जारी नहीं किया। प्रयागराज निवासी अक्षत त्रिपाठी को कार्यपालक मजिस्ट्रेट की ओर से पांच लाख रुपये के मुचलके का नोटिस दिया गया था। नोटिस में आरोप लगाया गया था कि अक्षत सीजेपी के धरने में शामिल होने के लिए विश्वविद्यालय के दूसरे छात्रों को उकसा रहे थे। साथ ही उन पर सरकार विरोधी भ्रामक बातें फैलाने का आरोप लगाया गया था। इस संबंध में थाना ईकोटेक-1 में तैनात उपनिरीक्षक शिवा पांडेय ने अपनी आख्या तैयार की थी। थाना प्रभारी की ओर से इसे आगे भेजा गया, जिसके बाद मजिस्ट्रेट तृतीय गौतमबुद्ध नगर की ओर से नोटिस जारी हुआ。
नोटिस जारी होने के बाद की स्थिति
नोटिस सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर जिला प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए। सीजेपी के एक नेता ने भी मामले को लेकर प्रशासन पर निशाना साधा। इसके बाद पुलिस कमिश्नरेट की ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया गया कि कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद बीएनएस से संबंधित मामलों की कार्रवाई गौतमबुद्ध नगर पुलिस के अधिकार क्षेत्र में है। पुलिस के बयान के मुताबिक बीएनएस में जिन मामलों में कार्यपालक मजिस्ट्रेट का उल्लेख है, कमिश्नरेट व्यवस्था में उनकी जिम्मेदारी पुलिस विभाग के अधिकृत अधिकारी निभाते हैं। ऐसे मामलों की फाइल जिलाधिकारी, एडीएम या एसडीएम के पास नहीं भेजी जाती है। पुलिस के अपने मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी स्वतंत्र रूप से नियमानुसार कार्रवाई करते हैं। विवाद सामने आने के बाद छात्र को जारी किया गया पांच लाख रुपये के मुचलके का नोटिस वापस ले लिया गया। साथ ही, पुलिसकर्मियों की भूमिका की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने साफ किया है कि जिलाधिकारी ने छात्र के खिलाफ धारा-130 के तहत किसी तरह का आदेश जारी नहीं किया था।
मामले की जांच
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अपर आयुक्त कानून और व्यवस्था राजीव नारायण मिश्रा ने कहा कि इस मामले की जांच एडीसीपी संतोष कुमार को सौंपी गई है। उनकी जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई होगी।
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हमारे युवाओं के खिलाफ कार्रवाई करने का सवाल ही नहीं : सीजेआई
पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर आंदोलन में भाग लेने पर छात्र को नोटिस जारी करने के मामले में जस्टिस बागची ने कहा कि चूंकि नोटिस वापस ले लिया गया है तो अब क्या कार्रवाई की जा सकती है? इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता भट्टाचार्य ने कहा कि भले नोटिस वापस ले लिया गया है, लेकिन नोटिस जारी करना अपने आप में अदालत की अवमानना है। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया अधिकारी अदालत की अवमानना के दोषी हैं और बाद में नोटिस वापस ले लेने से उन्हें अवमानना की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता। इस पर सीजेआई ने वरिष्ठ अधिवक्ता से कहा कि आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। हमारे युवाओं के खिलाफ कार्रवाई करने का कोई सवाल ही नहीं है।
नोटिस जारी करने की प्रक्रिया
अधिकारी को बताना होगा नोटिस क्यों जारी किया?
सीजेआई ने कहा कि हम हैरान हैं कि मजिस्ट्रेट नोटिस कैसे जारी कर सकती हैं, जबकि यह बिल्कुल स्पष्ट आदेश था। पीठ ने अधिवक्ता से मामले के तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने और उचित अर्जी दाखिल करने को कहा। पीठ ने कहा कि हम स्पष्टीकरण मांगेंगे। अधिकारी को बताना होगा कि नोटिस क्यों जारी किया गया।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका
नोटिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
पेपर लीक के मुद्दे पर जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन में शामिल होने पर कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के खिलाफ गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के एक छात्र ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। छात्र ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी नोटिस को चुनौती दी है। जीबीयू के छात्र अक्षत त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी नोटिस को चुनौती दी है।


