जंतर-मंतर में छात्रों पर कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन
देहरादून में छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों ने मंगलवार को परेड ग्राउंड पर विरोध-प्रदर्शन किया। वे दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ थे। सतीश धौलाखंडी और उनके साथियों ने जनगीतों के माध्यम से प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। एसएफआई के नितिन मलेठा ने बल प्रयोग को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।

देहरादून। प्रमुख संवाददाता सोनम वांगचुक तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं। धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो। कुछ इसी तरह के नारों के साथ मंगलवार को छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों ने परेड ग्राउंड पर विरोध-प्रदर्शन किया। वे दिल्ली के जंतर-मंतर में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का विरोध कर रहे थे। प्रदर्शन के बाद परेड ग्राउंड से घंटाघर तक प्रतिरोध मार्च निकाला गया。
कार्यक्रम के दौरान सभा
कार्यक्रम के दौरान गांधी पार्क में एक सभा भी की गई। जिसमें सतीश धौलाखंडी और उनके साथियों ने जनगीतों के माध्यम से प्रदर्शनकारियों को दर्द बयां किया। जबकि अरमान ने रैप गीत के माध्यम से अन्याय और दमन के खिलाफ संघर्ष का संदेश दिया। इसी बीच दिल्ली में आयोजित छात्र मार्च में शामिल होकर लौटे स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के छात्रों का भी स्वागत किया गया। सामाजिक कार्यकर्ता एवं डीएवी के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष लेखराज ने कहा कि ये सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या है। युवाओं को इसके खिलाफ एकजुट होना होगा। महिला मंच की निर्मला बिष्ट,एसएफआई के हिमांशु चौहान, कांग्रेस नेता पंकज क्षेत्री और त्रिलोचन भट्ट ने छात्रों के आंदोलन पर हुई कार्रवाई की आलोचना की। एसएफआई उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष नितिन मलेठा ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास किया गया, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
दिल्ली का दर्द किया बयां
इस दौरान दिल्ली से आंदोलन के बाद लौटे मुकुल, कनिका, अर्सलान, सौरभ, अनामिका, इजराइल और समीर का वहां जोरदार स्वागत किया गया। उन्होंने भी जंतर-मंतर के घटनाक्रम और छात्र आंदोलन के अनुभव साझा किए। प्रदर्शन के समापन पर आयोजकों ने 22 जुलाई को गांधी पार्क में आयोजित विरोध-प्रदर्शन में अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की अपील की।
ये लगा रहे थे नारे
पेपर लीक का जवाब दो, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो
धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करो, एनटीए को रद्द करो
क्या इस देश में युवाओं के भविष्य का केवल यही हाल है? अगर हां, तो संसद की तरफ डर से देख रहे हैं
हालात इतने बुरे हैं कि विशेषाधिकार प्राप्त लोग भी सड़कों पर मौजूद हैं
लोकतंत्र की हत्या हो चुकी है


