बच्चे बनेंगे ‘स्वच्छता दूत’, घर-घर पहुंचाएंगे सफाई का संदेश
अब सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी सिर्फ किताबों से पढ़ाई नहीं करेंगे, बल्कि स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का संदेश लेकर घर और समाज तक भी पहुंचेंगे। शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों को ‘स्वच्छता दूत’ के रूप में तैयार करने की पहल शुरू की है।

युवा की लीड ------ अभियान विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया कचरे को अलग-अलग करने की आदत सीखेंगे बच्चे, करेंगे जागरूक बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूल जिला व राज्य स्तर पर होंगे सम्मानित फोटो संख्या- 05, कैप्सन- मंगलवार को मध्य विद्यालय रामपुर मठिया में स्वच्छता का पाठ पढ़ते बच्चे। डुमरांव, संवाद सूत्र। अब सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी सिर्फ किताबों से पढ़ाई नहीं करेंगे, बल्कि स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का संदेश लेकर घर और समाज तक भी पहुंचेंगे।
स्वच्छता दूत की पहल
शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों को ‘स्वच्छता दूत’ के रूप में तैयार करने की पहल शुरू की है। इसके तहत बच्चों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के साथ उन्हें व्यवहारिक गतिविधियों से जोड़ा जाएगा, ताकि स्कूल में सीखी गई स्वच्छता की आदत घर और आसपास के समाज तक पहुंच सके।
तरह-तरह की गतिविधियाँ
शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को दैनिक गतिविधियों का हिस्सा बनाने का निर्देश दिया है। विभाग ने इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। अभियान के तहत विद्यार्थियों को गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने, कचरे को निर्धारित स्थान पर डालने और अनावश्यक रूप से कचरा नहीं फैलाने के बारे में जानकारी दी जाएगी।
स्वच्छता के प्रति जागरूकता
बच्चों को केवल स्वच्छता संबंधित जानकारी देकर अभियान समाप्त नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें व्यवहार में इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। विद्यार्थी अपने घर के सदस्यों को भी कचरे के उचित प्रबंधन और साफ-सफाई के प्रति जागरूक करेंगे। पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाया जाएगा विद्यालयों में स्वच्छता को लेकर प्रभातफेरी, जागरूकता रैली, निबंध लेखन, वाद-विवाद प्रतियोगिता, दीवार लेखन सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को स्वच्छता के महत्व और पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाया जाएगा।
विशेष कार्यक्रम
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सप्ताह, स्वच्छता पखवाड़ा, विश्व पर्यावरण दिवस और ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के दौरान विशेष कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया गया है। वहीं शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालयों में संचालित स्वच्छता गतिविधियों की नियमित समीक्षा की जाएगी। स्कूलों में बच्चों की भागीदारी, कचरा प्रबंधन की व्यवस्था और जागरूकता कार्यक्रमों की प्रगति पर नजर रखी जाएगी। बेहतर कार्य करने वाले विद्यालयों का चयन कर उन्हें जिला और राज्य स्तर पर सम्मानित भी किया जाएगा। क्या कहते है अधिकारी विद्यार्थी जब स्वयं गीले और सूखे कचरे को अलग रखने जैसी आदत अपनाएंगे, तो इसका सकारात्मक प्रभाव उनके परिवार और समाज पर भी पड़ेगा। स्कूलों में आयोजित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाएगा। सुधांशु कुमार, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, डुमरांव


