आवारा गाय व कुत्तों के पुनर्वास को लेकर मास्टरप्लान में नहीं ठोस व्यवस्था
::: आवारा पशुओं से आफत ::::-गौशाला व डॉग शेल्टर होम की कमी, सरकार अपने स्तर पर बना रही योजनाएं -अवैध डेयरियों को शहर से बाहर ले जाने की योजना पर भी कोई ठोस कदम नहीं उठानई दिल्ली। राजधानी में आवारा...

::: आवारा पशुओं से आफत :::: -गौशाला व डॉग शेल्टर होम की कमी, सरकार अपने स्तर पर बना रही योजनाएं
-अवैध डेयरियों को शहर से बाहर ले जाने की योजना पर भी कोई ठोस कदम नहीं उठा
नई दिल्ली। राजधानी में आवारा पशुओं को पकड़ने के बाद उन्हें रखने के लिए पर्याप्त शेल्टर उपलब्ध नहीं हैं। गायों के लिए गौशालाओं की भारी कमी है, आक्रामक आवारा कुत्तों को अलग रखने के लिए एक भी शेल्टर मौजूद नहीं है। कुत्तों बंध्याकरण केंद्र भी सीमित हैं। इस समस्या के बावजूद नए मास्टरप्लान में इनकी कमी दूर करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं दी गई है। हालांकि दिल्ली सरकार 13 जिलों में एक-एक गौशाला बनाने की योजना बना रही है, लेकिन इसके लिए जगह चिह्नित करने से लेकर योजना की रूपरेखा तय करने तक का काम अभी बाकी है। कुत्तों के लिए एक शेल्टर बनाने का काम प्रारंभिक चरण में है।
आवारा गायों को रखने की नहीं जगह
आवारा गायों की समस्या गंभीर है। रोहिणी, बवाना, आजादपुर, गाजीपुर, आईपी एक्सटेंशन, मंडावली, खिचड़ीपुर, कृष्णा नगर, नंद नगरी, बुराड़ी, बदरपुर, महरौली, सरिता विहार, संगम विहार, वसंत कुंज समेत कई इलाकों में सड़कों पर इनका जमावड़ा किसी भी वक्त देखा जा सकता है। सड़कों पर घूमती यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई है और इनके कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। मौजूदा समय में राजधानी में चार अधिकृत और छह अनधिकृत गौशालाएं हैं।इनमें कुल मिलाकर 45 हजार गोवंश रखे जा रहे हैं। अधिकृत गौशालाएं दिल्ली सरकार के अधीन हैं। इनमें से सरकार की दो में तो पहले से क्षमता से अधिक गाय रखी जा रही हैं। बाकी दो में नाममात्र जगह बची है। इसी कमी को देखते हुए सरकार अब 13 जिलों में एक-एक नई गौशाला बनाने की योजना पर विचार कर रही है, लेकिन अभी तक इसके लिए जमीन चिह्नित करने और योजना की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने का काम पूरा नहीं हो सका है। नए मास्टरप्लान में गौशाला की अनुमति का जिक्र जरूर है, लेकिन कोई ठोस प्रावधान नहीं दिखता। कुत्तों के मामले में भी स्थिति बेहतर नहीं है।
प्रत्येक जोन में डॉग शेल्टर होम प्रस्तावित, एक का काम चालू
राजधानी का कोई इलाका ऐसा नहीं, जहां आवारा कुत्तों से लोगों को समस्या न हो। सड़कों से लेकर पार्क, अस्पताल और रेलवे परिसर तक में आवारा कुत्ते परेशानी का सबब बने हुए हैं। यहां तक की आईजीआई एयरपोर्ट पर कुत्तों की समस्या काफी गंभीर है। इसे लेकर वर्तमान में कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। लेकिन नगर निगम ने अपने 12 जोन में आधुनिक डॉग शेल्टर होम बनाने की एक विस्तृत योजना तैयार की है। आवारा कुत्तों की समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए निगम प्रशासन ने इनमें से द्वारका सेक्टर-29 में एक डॉग शेल्टर होम का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। यहां छह हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में डॉग शेल्टर होम का निर्माण नवंबर में हो जाएगा। इसमें 1500 कुत्तों को रखने की क्षमता होगी। इसी तरह पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर में दूसरे डॉग शेल्टर के लिए पांच एकड़ भूमि चिह्नित की है, लेकिन निर्माण शुरू होने में समय लगेगा। बाकी 10 जोन में उनके लिए भूमि चिह्नित करने का काम शुरू नहीं हो पाया है।पुराने सर्वे के आधार पर लगाए गए अनुमान के तहत इस समय दिल्ली में 8 से 10 लाख कुत्ते हैं। इनके बंध्याकरण के लिए
बंदरों को लेकर कोई योजना नहीं
नगर निगम के पास केवल 20 बंध्याकरण केंद्र हैं, जहां हर महीने करीब 10 हजार कुत्तों का बंध्याकरण किया जाता है।
बंदरों को लेकर कानून सख्त है। जंगली जानवर होने के कारण उसे पकड़ कर जंगल में ही छोड़ने का नियम है। इसी कारण पूरी दिल्ली से पकड़े गए बंदर असोला भाटी अभ्यारण्य में छोड़े जाते हैं। इस कारण अभ्यारण्य के आसपास के इलाकों में इनकी उछल-कूद काफी देखी जाती है। लोग मांग कर चुके हैं कि बंदरों को अरावली की पहाड़ी या किसी दूसरे जंगलों में छोड़ कर आया जाए।
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गौशालाओं से निकल रहा 440 टन गोबर
अधिृकत और अनधिकृत 10 गौशलाओं से रोज 440 मीट्रिक टन गोबर निकलता है। इसका निस्तारण भी चुनौती है। कई गौशालाओं में गोबर से उपले, धूप बत्ती व अन्य उत्पाद बनाने का काम किया जाता है। फिर भी पूरा गोबर निस्तारित नहीं हो पाता। नए मास्टरप्लान में इस समस्या को दूर करने के लिए बायोगैस प्लांट लगाने की योजना का जिक्र है।
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500 अनधिकृत डेयरियां बनी समस्या
देश की राजधानी में गली मोहल्लों में अवैध रूप से डेयरियां चल रही हैं। नए मास्टरप्लान में बताया गया है कि दिल्ली में 500 अनधिकृत डेयरियां चल रही हैं, जिनमें 20 हजार से अधिक गाय व भैंस हैं। इनके कारण शहरी क्षेत्र में गंदगी और नाले-नालियां जाम होने की समस्या होती है। डेयरी जानवरों को सड़क पर रखते हैं, जिससे यातायात संबंधी समस्या भी होती है। इन्हें लेकर नगर निगम की बैठकों से लेकर कई जगह मुद्दा उठ चुका है। लोग नियमित रूप से इनकी शिकायत करते हैं। लेकिन इनको दूसरी जगह शिफ्ट करने की कोई ठोस योजना नहीं है।
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220 बेसहारा कुत्तों का सहारा बना निजी डॉग शेल्टर
स्थान: त्रिलोकपुरी
राजधानी में सरकारी डॉग शेल्टर की कमी के बीच त्रिलोकपुरी का एक निजी डॉग शेल्टर बीते सात सालों से बेसहारा और घायल कुत्तों का सहारा बना हुआ है। एनिमल रेन बसेरा में फिलहाल करीब 220 कुत्तों की देखभाल की जा रही है। इनमें ज्यादातर वे कुत्ते हैं, जो सड़क पर घायल होने के बाद यहां पहुंचते हैं या जिन्हें लोग बेसहारा छोड़ जाते हैं। शेल्टर में इनके खाने-पीने से लेकर इलाज और दवाओं तक का इंतजाम है।
एनिमल रेन बसेरा ट्रस्ट के संस्थापक राहुल टेपर ने बताया कि शेल्टर की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी। तब से अब तक ट्रस्ट अपने स्तर पर कुत्तों की देखभाल कर रहा है। सरकार की ओर से जमीन के अलावा किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिलती। कुत्तों के भोजन, दवाओं और उपचार का खर्च ट्रस्ट और लोगों से मिलने वाले दान से पूरा किया जाता है। किसी के पालतू कुत्ते के बीमार होने पर भी यहां मामूली शुल्क में उपचार किया जाता है। राहुल ने बताया कि यहां आने वाले कई कुत्ते गंभीर रूप से घायल या बीमार होते हैं। उनका उपचार करने के बाद उन्हें शेल्टर में ही रखा जाता है। उन्होंने कहा कि यमुनापार में यह इकलौता डॉग शेल्टर है, लेकिन इसके संचालन के लिए सरकार या स्थानीय प्रशासन से नियमित मदद नहीं मिलती। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली विभाग की ओर से बिजली काटने का नोटिस मिलने से शेल्टर की मुश्किल बढ़ गई है। कुत्तों की कई दवाएं फ्रिज में रखी जाती हैं। बिजली कटने पर इनके खराब होने का खतरा है। गर्मी में शेल्टर में रहने वाले कुत्तों की परेशानी भी बढ़ सकती है।
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डॉग को रखने की नहीं है जगह
स्थान : जंगपुरा
नई दिल्ली व दक्षिणी दिल्ली में निजी डॉग शेल्टर नहीं न ही कोई गौशाला है। यहां सिर्फ गैर सरकारी संगठन द्वारा संचालित सीमित पशु चिकित्सालय व डॉग शेल्टर हैं। जंगपुरा स्थित एक निजी पशु चिकित्सालय व डॉग शेल्टर में सभी तरह की सुविधा है। यहां कुछ डॉग को रखने के लिए शेल्टर भी है। यहां मौजूद एक कर्मचारी ने बताया कि इस समय में और डॉग रखने की बिल्कुल जगह नहीं है। उनका कहना है कि 200 से 250 डॉग रखने की जगह है। लेकिन, मौजूदा समय 400 से अधिक डॉग हैं। यह क्षमता से काफी अधिक है। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था घायल और बेसहारा जानवरों के लिए रेस्क्यू, चिकित्सा और देखभाल की सुविधा देती है।
हौज खास से तीन कुत्तों को इलाज के लिए लेकर आए शुभम ने बताया कि यहां इलाज के लिए तो स्वीकृति मिल गई है, लेकिन शेल्टर में जगह न होने की वजह से कुत्तों को रखा नहीं जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक रोहिणी में डॉग शेल्टर है, लेकिन उस संस्था ने भी जगह न होने की बात की है।
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साफ सुथरे तरीके से कर रखी है रहने खाने की व्यवस्था
स्थान : धर्म संघ गौसेवा सदन, यमुना बाजार
यमुना बाजार स्थित धर्म संघ गौसेवा सदन में 1957 से गायों को आसरा दिया जा रहा है। गायों के रहने व खाने पीने के स्थानों की व्यवस्था साफ सुथरी दिखाई दी। कर्मचारी ने बताया कि यहां नियमित रूप से साफ सफाई की जाती है। हरे चारे और पशु आहार इत्यादि की खुराक का भी ध्यान रखा जाता है। चारा काटने की मशीन गौशाला के अन्दर ही मौजूद है। इससे काटा गया ताजा चारा ही गायों को खिलाया जाता है। साथ ही मच्छरों इत्यादि से बचाव और नहलाने धुलाने का पूरा ख्याल रहता है।
ट्रस्टी नित्यानंद ने बताया कि गौशाला में वर्तमान में 225 गायों की देखभाल की जा रही है। इतने दशकों से निरंतर गौसेवा करने के बावजूद, इस सदन को सरकार की तरफ से कोई भी आर्थिक मदद नहीं मिलती है। यहां गायों के लिए चारा, पानी और रखरखाव की पूरी व्यवस्था केवल आम लोगों के चंदे और ट्रस्टियों के निजी सहयोग पर ही निर्भर है। स्थायी ट्रस्टियों को अलावा स्थानीय लोग भी देखभाल के लिए होने वाले खर्च में मदद कर देते हैं।
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गौशाला व डेरियों की स्थिति
गौशाला व डेयरी संख्या पशु प्रतिदिन गोबर (मीट्रिक टन)
अधिकृत डेयरी 11 52000 520
अनधिकृत डेयरी 500 20000 200
अधिकृत गौशाला 04 24000 240
अनधिकृत गौशाला 06 20000 200
(स्रोत : मास्टरप्लान 2047 का नोटिफिकेशन)
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