तमाम मुश्किलों के बावजूद,युवाओं ने नहीं मानी हार
विशेष - अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस- फोटो है- रांची,संवाददाता। आर्थिक तंगी से जूझते घर, बरसों

विशेष - अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस- फोटो है-
रांची,संवाददाता।
आर्थिक तंगी से जूझते घर, बरसों की मेहनत, और आंखों में एक अफसर बनने का सपना। झारखंड के हजारों मध्यम वर्गीय परिवारों के युवाओं की यह कहानी है। घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद भी उन्होंने खुद को संभाले रखा। साथ ही इस दौरान कई बार मानसिक तनाव ने घेरा पर हिम्मत नहीं हारी। परिवार से दूर, अकेले शहर के किसी कमरे में जब घरवालों की याद सताती, तब भी वे डटे रहे.. किताबों में डूबे, अपने सपनों को सींचते रहे। यह सिर्फ एक परीक्षा पास करने की जिद्द नहीं थी, यह एक पूरी पीढ़ी की गरिमा और भविष्य को बचाने की लड़ाई-लड़ रहें हैं।
महान संघर्ष
लेकिन जब मेहनत और ईमानदारी की यह लड़ाई प्रतियोगिता परीक्षाओं के पेपर लीक और परीक्षा में हो रही धांधली के सामने आती है, तो यह सपना चकनाचूर हो जाता है। जो बच्चे रात-रात भर जागकर पढ़ते रहे, वे उन हाथों के आगे हार जाते है। लेकिन इसके बावजूद उनका मनोबल नहीं गिरता है वो पुन: मजबूती के साथ अपने हक की लड़ाई लड़कर अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।
सबिता की कहानी
सबिता घर की पहली बेटी ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की,लेकिन नौकरी नहीं मिली
रांची की रहने वाली सबिता पिछले लंबे समय से सरकारी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने बताया की उनकी पांच बहनें है। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से सभी बहनों की शादी कम उम्र में ही कर दी गई थी। उन्होंने अपनी पढ़ाई तक पूरी नहीं की है,वो बताती है की घर की पहली बेटी है जिसने ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की है।
उनके पिता छोटे से किसान है सबिता की सपना शुरु से ही अफसर बिटिया बना था। लेकिन परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ी ने उन्हें काफी कमजोर कर दिया है। उनके परिवार वाले लगातार उनपर शादी करने का दबाव बनाते है,लेकिन उनका कहना है की वो अब अपने परिवार में पहली नौकरी प्राप्त करने वाली महिला बने की चाह रखती है। उनका कहना है की कितना भी समय क्यों न लगे लेकिन मैं अपनी जिद पूरी कर के रहूंगी।
प्रतियोगिता परीक्षा का दर्द
मेहनत और प्रतिभा लेकिन प्रतियोगिता परीक्षा ने बनाया बेरोजगार
जीत कुमार बताते है की वो पिछले सात वर्षों से राज्य में होने वाली प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहें है। उन्होंने बताया की घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से कई प्रकार की समस्याओं का भी सामना करना पड़ा है। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण बचपन में अच्छी शिक्षा तक नहीं मिल पाई। काफी मेहनत के बाद उनका दाखिला माध्यमिक शिक्षा के लिए नेतरहाट आवासीय विद्यालय में हुई। ग्रेजुएशन की पढ़ाई रांची के संत जेवियर्स कॉलेज से पूरी हुई।
वो बताते है की तमाम मेहनत और प्रतिभा होने के बावजूद बेरोजगार होकर अपने हक की लड़ाई लड़ने पर मजबूर है। आर्थिक स्थिति और तंगहाली की वजह से पढ़ाई के दौरान कई रातें भूखे पेट बितानी पड़ी हैं। घर की बिगड़ती हालात को देखते हुए अपने खर्चों को पूरा करने के लिए ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। लेकिन बेरोजगार का टैग समाज की ओर से मिलना सबसे अधिक तनाव और दर्द देता है। इन तमाम दर्द के बावजूद अपने भविष्य की लड़ाई जारी है।
घर से दूर रहने का दर्द
नौकरी नहीं मिलने की वजह से वर्षों से घर नहीं गया
आठ वर्षों से घर से दूर रांची में रहकर प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहा हूं। लेकिन इतने वर्षों की मेहनत के बावजूद अब तक नौकरी नहीं मिली। हम आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से तालुक रखते है। छात्र रात दिन बिना किसी सुविधा के रात दिन नौकरी पाने के लिए मेहनत करते है। घरों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने की वजह से बार-बार न फॉर्म भरना और न परीक्षा दे पाना संभव हो पाता है। अंकित बताते है की कई बार दिन रात की मेहनत केवल परीक्षा केंद्र से निकलते ही पेपर लीक की खबर के साथ चकना चूर हो जाती है। तो कुछ समय परिणाम के लंबे इंतजार के बाद सीट बिक जाने की खबर मिलती है।
नौकरी नहीं मिलने की वजह से अक्सर गांव वाले कई सवाल करने लग जाते है,इसी फ्रस्टेशन में कई बार घर तक नहीं जाता। इस दौरान अक्सर आत्महत्या जैसे सवाल मन में आ जाते,लेकिन इसके बावजूद हिम्मत नहीं हारी। लक्ष्य पर अडिग हूं।
परिवार की जिम्मेदारी
पिता नहीं घर की स्थिति कमजोर,लेकिन हिम्मत बरकार
घर की पूरी जिम्मेवारी मां के ऊपर है। कार्तिक बताते है की समय के साथ मां भी कमजोर होते जा रही है। कई बार प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारियों के लिए किताबें खरीदने तक के पैसे नहीं हुआ करते है। लेकिन राज्य में इन परीक्षों में जिसप्रकार से धांधली हो रही है। हमारी हिम्मत तोड़ दी है,परीक्षा में न तो फॉर्म और न किताबें खरीदने तक के पैसे होते है। घर की परेशानी देखकर पैसे लेना छोड़ दिया।
भविष्य में आगे कुछ और करने का सोचा लेकिन आर्थिक तंगी की वजह अन्य विक्लप भी नहीं सोच सकते थे। हमें लगाता है की कम चीजों में मेहनत के साथ आसानी से सराकरी नौकरी ली जा सकती है। पैसे नहीं होने पर शहर में छोटे-मोटे काम करना शुरू किया,लेकिन पढ़ाई कर दोनों को साथ करन पाना चुनौतिपूर्ण हो जाता है। जिसवजह से कई बार मन में दुनिया छोड़कर जाने के सवाल भी आए। लेकिन मां की हिम्मत ने हमेशा आगे बढ़ने का हौसाला दिया।


