टीएचएसटीआई आयोजित सम्मेलन में सम्मेलन में संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर
ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट में सम्मेलन में वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं ने नवाचार को तेजी से मरीजों तक पहुँचाने के लिए सहयोग की आवश्यकता जताई। टीएचएसटीआई के निर्देशन में नए चिकित्सा अनुसंधान केंद्र और क्लीनिकल ट्रायल की सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं।

फरीदाबाद, अभिषेक शर्मा। ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (टीएचएसटीआई) में आयोजित सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें देश-विदेश के वैज्ञानिकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, उद्योग जगत और नीति निर्माताओं ने वैज्ञानिक शोध को तेजी से मरीजों तक पहुंचाने के लिए सरकार, उद्योग और शोध संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। конференस में स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार, क्लीनिकल रिसर्च, बायोटेक्नोलॉजी और नियामक सुधारों पर विस्तार से चर्चा हुई।
स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार
टीएचएसटीआई के कार्यकारी निदेशक प्रो. जी कार्तिकेयन ने कहा कि प्रयोगशाला में होने वाली खोज और उसके मरीजों तक पहुंचने के बीच अभी लंबा अंतर है। इस दूरी को कम करने के लिए संस्थान ने मेडिकल रिसर्च सेंटर (एमआरसी) और एपेक्स जैसी नई पहल शुरू की हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल रिसर्च सेंटर के माध्यम से शुरुआती चरण के क्लीनिकल ट्रायल, भारत का पहला क्लीनिकल हेल्थ इंफॉर्मेशन सिस्टम (सीएचआईएस) और अत्याधुनिक कार-टी सेल थेरेपी जैसी सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है। सम्मेलन के दौरान ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने कहा कि भारत की नियामक प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज और विज्ञान आधारित बनाया जा रहा है। इससे नई दवाओं और जैविक उत्पादों के विकास में तेजी आएगी। उन्होंने उद्योग और नियामक संस्थाओं के बीच लगातार संवाद बनाए रखने पर भी जोर दिया। ------
100 दिनों में नए संक्रमण से निपटने की तैयारी
कोविड-19 से मिले अनुभव
नीति आयोग के सदस्य प्रो. एम श्रीनिवास ने कहा कि कोविड-19 से मिले अनुभवों के आधार पर भारत को किसी भी नए संक्रमण का 100 दिनों के भीतर प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके लिए तेज नियामक प्रक्रिया, ट्रांसलेशनल ब्रिज फंड, राष्ट्रीय रेफरेंस लैब नेटवर्क और नवाचार आधारित खरीद प्रणाली जैसे कदम अहम होंगे। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में एएनआरएफ (अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन) एवं बीआईआरएसी (बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल , गेट्स फाउंडेशन, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर, भारत बायोटेक, सीरम इंस्टीट्यूट, सिप्ला और सीएमसी वेल्लोर सहित कई संस्थानों के विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर बल दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि मजबूत बायोमैन्युफैक्चरिंग, विश्वसनीय डेटा, नैतिक शोध, शुरुआती वित्तीय सहायता और बेहतर इनक्यूबेशन व्यवस्था के बिना स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े बदलाव संभव नहीं हैं।
वैज्ञानिक खोज का समय पर लाभ
बायोकॉन की कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. किरण मजूमदार-शॉ ने वीडियो संदेश में कहा कि किसी भी वैज्ञानिक खोज की वास्तविक सफलता तभी है, जब उसका लाभ समय पर मरीजों तक पहुंचे। इसके लिए शोध संस्थानों, उद्योग और सरकार के बीच भरोसेमंद साझेदारी को और मजबूत करना आवश्यक है। सम्मेलन में बायोटेक स्टार्टअप और अनुसंधान आधारित नवाचार को वैश्विक स्तर तक ले जाने की रणनीतियों पर भी चर्चा की गई।
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