इंफो::वजन घटाने वाली जेनेरिक दवाओं में कम हुई दिलचस्पी
नोट: कृप्या मिंट का लोगो लगाएं, ग्राफ के लिए मिंट देखें उछाल के बाद

नोट: कृपया मिंट का लोगो लगाएं, ग्राफ के लिए मिंट देखें उछाल के बाद धीमी हुई बिक्री,अब मांग स्थिर
जेनेरिक दवा बनानेवाली योजनाओं पर असर पड़ेगा
जेसिका जानी
नई दिल्ली। शुरुआती उछाल के बाद जेनेरिक सेमाग्लूटाइड ब्रांड्स की बिक्री स्थिर हो गई है। मांग के स्थिर होने के साथ, उद्योग विश्लेषकों को उम्मीद है कि जून का यह रुझान पूरे साल जारी रहेगा। इसने उन कई जेनेरिक दवा निर्माताओं की योजनाओं पर पानी फेर दिया है जिन्होंने इस प्रतिस्पर्धी बाजार में कदम रखा था।
जेनेरिक सेमाग्लूटाइड क्या हैं?
सेमाग्लूटाइड, नोवो नॉर्डिस्क की वजन घटाने और टाइप-2 डायबिटीज की दवा का नाम है, जिसे वेगोवी और ओजेम्पिक ब्रांड नामों से जाना जाता है। इस दवा ने मार्च के अंत में भारत में अपना पेटेंट अधिकार खो दिया, जिसके बाद इसके कई जेनेरिक यानी कॉपीकैट वर्जन बाजार में आ गए। इन दवाओं को 50-90% कम कीमत पर लॉन्च किया गया। पेटेंट खत्म होने के तुरंत बाद कई कंपनियों द्वारा 30 से अधिक ब्रांड लॉन्च किए गए, जिनमें डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सन फार्मा, टॉरेंट फार्मा, ग्लेनमार्क, एरिस लाइफसाइंसेज, जायडस लाइफसाइंसेज और अन्य शामिल हैं। इसने कीमतों की जंग भी शुरू की जिसके चलते मूल निर्माता कंपनी को अपनी कीमतें घटानी पड़ी।
दवाओं की बिक्री धीमी हुई
दवाओं पर नजर रखने वाली संस्था 'फार्मारैक' के आंकड़ों के मुताबिक, जेनेरिक दवाओं के लॉन्च होने के ठीक दो महीने बाद ही, बिक्री की रफ्तार धीमी हो गई, जबकि मूल निर्माता स्थिर गति से बढ़ते रहे।
जून 2026 तक बाजार में 238% की वार्षिक वृद्धि दर्ज हुई, जिससे यह 2055 करोड़ रुपये का हो गया। हालांकि, इस पर बड़े पैमाने पर तिरजेपेटाइड का दबदबा था, जो कि अमेरिकी मूल निर्माता एली लिली की एक और वजन घटाने और डायबिटीज की दवा है। 'मौन्जारो' ब्रांड नाम से बिकने वाली इस अकेले दवा की एक साल में कुल बिक्री 1,300 करोड़ रुपये रही, जबकि सेमाग्लूटाइड का योगदान 649 करोड़ रुपये था।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
फार्मारैक की रिपोर्ट के अनुसार, जेनेरिक ब्रांडों ने मात्रा के मामले में बाजार को काफी आगे बढ़ाया। जून में कुल यूनिट्स की बिक्री में उनकी हिस्सेदारी 82% थी। हालांकि, यह विस्तार पहले ही अपने चरम पर पहुंच चुका है, अब इसमें किसी और भारी उछाल की गुंजाइश नहीं दिख रही है। जो मरीज मूल दवाओं तक नहीं पहुंच पा रहे थे, वे शायद पहले ही इस सिस्टम से जुड़ चुके हैं। अब चुनौती उन्हें बनाए रखने की है। अध्ययनों से पता चला है कि साइड इफेक्ट्स या जेब पर पड़ने वाले खर्च के कारण एक साल के भीतर जीएलपी-1 दवाएं लेने वाले 30-50% मरीज इन्हें बीच में ही छोड़ देते हैं।
मूल निर्माता आगे बढ़ रहे
जेनेरिक दवाओं के आने से बाजार हिस्सेदारी खोने के डर को खारिज करते हुए, मूल निर्माता कंपनियों 'नोवो नॉर्डिस्क' और 'एली लिली' ने अपने घरेलू साझेदारों (सिप्ला, एमक्योर और एबॉट) के साथ मिलकर लगातार महीने-दर-महीने बढ़त दिखाई है। यह डॉक्टरों के भरोसे और नए मरीजों के जुड़ने को दर्शाता है।
जेनेरिक दवाओं के लॉन्च होने के तुरंत बाद, नोवो नॉर्डिस्क ने घरेलू कंपनियों से मुकाबला करने के लिए अपने ब्रांड्स की कीमतों में 48% तक की कटौती कर दी थी।
मुनाफे में अभी भी वृद्धि की उम्मीद
फार्मारैक के अनुसार, वैल्यू के मामले में अगले छह महीनों में जीएलपी-1 कैटेगरी में अभी भी 111% की वृद्धि होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए मरीजों को जोड़ने की रफ्तार धीमी हो सकती है। अगले एक साल में, केवल वही जेनेरिक ब्रांड बाजार में टिक पाएंगे जिनका डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क मजबूत है और जो डॉक्टरों के बीच भरोसा व ब्रांड वैल्यू बनाने में कामयाब रहेंगे।
जेनरिक दवाओं की मांग स्थिर(बिक्री, करोड़ रुपये में)
महीना जेनेरिक मूल निर्माता
जनवरी 2026 -- 18
फरवरी 2026 -- 24
मार्च 2026 12 22
अप्रैल 2026 38 23
मई 2026 40 24
जून 2026 40 25
स्रोत: फार्मारैक


