समर वेकेशन में बच्चों के शिक्षक बने इंजीनियरिंग छात्र
गुरुग्राम के तीन इंजीनियरिंग छात्रों ने समर वेकेशन में समाज सेवा की एक नई मिसाल पेश की है। संचित, शौर्य और जागृति ने आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को तीन सप्ताह तक निःशुल्क शिक्षा दी। उन्होंने गणित, विज्ञान, और अन्य विषयों पर पढ़ाई कराई और बच्चों को नैतिक मूल्यों और अनुशासन के महत्व के बारे में जागरूक किया।

गुरुग्राम, साक्षी रावत। समर वेकेशन को केवल छुट्टियों तक सीमित रखने के बजाय एसआरएम विश्वविद्यालय, चेन्नई के तीन इंजीनियरिंग विद्यार्थियों ने इसे समाज सेवा का माध्यम बनाया। तृतीय वर्ष के छात्र संचित जायसवाल, शौर्य श्रीवास्तव और जागृति दहिया ने आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को तीन सप्ताह तक निःशुल्क शिक्षा देकर एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने डीएलएफ एंगेज स्वयंसेवा कार्यक्रम के तहत संचालित बगिया एजुकेशन स्कूल में प्रतिदिन पहुंचकर बच्चों को गणित, विज्ञान, अंग्रेजी और सामान्य ज्ञान की पढ़ाई कराई। इसके साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, स्वच्छता, नैतिक मूल्यों और शिक्षा के महत्व के बारे में भी जागरूक किया।
बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ कक्षाओं में भाग लिया और इस पहल को अपने भविष्य के लिए उपयोगी बताया। छात्रों का कहना है कि समाज के प्रति जिम्मेदारी केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं होती। यदि युवा अपने ज्ञान, समय और कौशल का उपयोग जरूरतमंद बच्चों के मार्गदर्शन में करें तो उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उनका मानना है कि प्रत्येक विद्यार्थी यदि अपनी छुट्टियों का कुछ समय समाज सेवा के लिए समर्पित करे तो अनेक बच्चों को बेहतर शिक्षा और आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। इस पहल की बगिया एजुकेशन स्कूल की प्राचार्य बासुरी उपाध्याय ने सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ाने के साथ समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करते हैं। वहीं संजीव अरोड़ा, स्वाती, आनंद कुमार, मुरारी शर्मा, राजकुमार सैनी तथा समाजसेवी आर.के. जायसवाल सहित अन्य अभिभावकों ने भी विद्यार्थियों के प्रयास की प्रशंसा की।


