‘हरि शरणम’ के जाप और भगवान के आश्रय में ही कल्याण: आचार्य भूपेंद्र
श्रीधाम वृंदावन से आए आचार्य भूपेंद्र महाराज ने कहा कि भगवान के आश्रय में जीव का परम कल्याण निहित है। हरि शरणमं का जाप जीवन की समस्त व्याधियों को दूर करता है। आचार्य ने सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया और भक्तों को उपासना में जीवन लगाकर की प्रेरणा दी।

रांची, प्रमुख संवाददाता। श्रीधाम वृंदावन से आए आचार्य भूपेंद्र महाराज ने कहा कि भगवान के आश्रय में ही जीव का परम कल्याण निहित है। ‘हरि शरणमं’ नाम का जाप जीवन की समस्त व्याधियों और कष्टों को दूर कर देता है, इसलिए प्रत्येक मनुष्य को प्रातः काल उठकर हरि शरणमं का निरंतर जाप करना चाहिए। कथावाचक सोमवार को चुटिया स्थित एक बैंक्वेट हॉल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें एवं अंतिम दिन श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। सुदामा चरित्र के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सुदामा एक प्रतीक हैं और सच्ची मित्रता का उदाहरण कृष्ण-सुदामा के पावन संबंध से मिलता है। जब सुदामा तीन मुट्ठी चावल लेकर द्वारिका पहुंचे, तो भगवान श्रीकृष्ण ने केवल दो मुट्ठी चावल स्वीकार कर उन्हें दो लोकों का ऐश्वर्य और सुख प्रदान कर दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन को उपासना में लगाना चाहिए। जीवन में जरूरत को कभी मजबूरी न बनने दें।
आचार्य भूपेंद्र महाराज का विचार
आचार्य भूपेंद्र महाराज ने आगे कहा कि यदि मन में भगवत प्राप्ति की व्याकुलता जागृत हो गई है, तो यह जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। मनुष्य को अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हुए निष्काम भाव से स्वकर्तव्य पूरा करना चाहिए, क्योंकि जब कर्म सच्चा होता है तो वही भक्ति में परिवर्तित हो जाता है।
आयोजन का विवरण
कथा के उत्तरार्ध में उन्होंने यदुवंश को ऋषियों का श्राप, नव योगेश्वर संवाद, ठाकुर जी का स्वधाम गमन, शुकदेव जी की विदाई और राजा परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई। इसके बाद व्यास पीठ की महाआरती उतारी गई और महाप्रसाद का वितरण हुआ। आयोजन समिति द्वारा मंगलवार को विधि-विधान से हवन और महाभंडारे का आयोजन किया जाएगा।


