भगवान शिव भोले हैं इसलिए उन्हें भोले बाबा भी कहा जाता है
भोगनीपुर के राधाकृष्ण मंदिर में शिव पुराण कथा के दूसरे दिन कथावाचक सर्वेश द्विवेदी ने भगवान शिव के स्वभाव और कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि भगवान सिर्फ एक लोटा जल और धतूरे के फल से प्रसन्न हो जाते हैं। शिव के महापुराण में उनके सृष्टिकर्ता और संहारक स्वरूप की व्याख्या की गई है।

पुखरायां, संवाददाता भोगनीपुर में स्थित राधाकृष्ण मंदिर में सावन मास में चल रही शिव पुराण कथा के दूसरे दिन झलोखर से पधारे कथावाचक सर्वेश द्विवेदी ने कहाकि भगवान शिव भोले स्वभाव के हैं और एक लोटा जल व धतूरे के फल को अर्पित करने से ही खुश हो जाते हैं। शिव भोले हैं इसीलिए उन्हें भोले बाबा भी कहा जाता है।झलोखर से पधारे कथावाचक सर्वेश द्विवेदी ने शिव पुराण कथा के अंतर्गत दूसरे दिन शिव व पार्वती की कथा सुनाई। उन्होंने कहाकि शिव महापुराण सनातन धर्म के प्रमुख 18 पुराणों में एक है, जिसमें भगवान शिव को सृष्टि करता पालन करता व संहारक परमब्रह्मा में के रूप में माना गया है।
कहाकि शिव पुराण कथा के श्रवण करने से सुख, शांति व आनंद की प्राप्त होती है। भगवान शिव को खुश करने में केवल एक लोटा जल व धतूरे का फल अर्पित करना होता है। भोले शंकर अत्यंत भोले स्वभाव के हैं भक्तों से अति शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। उन्होंने भोले शिव सती की कथा भी सुनाई। इस अवसर पर परीक्षित अरविंद कुमार पांडे, नीलू, नीलम पांडे, शैलजा कुमारी, श्याम बाजपेई, आशीष बाजपेई, पवन मिश्र, बालमुकुंद सोनी आदि मौजूद रहे।


