छात्रों को माफ करने पर संतों ने प्रधानमंत्री को सराहा

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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आध्यात्मिक गुरुओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान अपशब्द कहने वालों को माफ करने की बात कही। स्वामी अवधेशानंद ने कहा कि यह भाषा भारतीय संस्कृति के खिलाफ है, जबकि स्वामी चिदानंद ने इसे करुणा के रूप में सराहा। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि अपशब्दों का प्रयोग पाप है।

छात्रों को माफ करने पर संतों ने प्रधानमंत्री को सराहा

नई दिल्ली, एजेंसी। आध्यात्मिक गुरुओं ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें अपशब्द कहने वालों को माफ करने की बात कही थी।

अपशब्दों का उपयोग

जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर प्रधानमंत्री और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ इस्तेमाल की गई अभद्र, असभ्य और अपमानजनक भाषा पूरी तरह से भारतीय संस्कृति, सभ्यता और सनातन के विपरीत है। किसी भी मतभेद, वैचारिक संघर्ष या राजनीतिक असहमति को कभी भी अपशब्दों के इस्तेमाल से हल नहीं किया जा सकता। ऐसी भाषा न तो लोकतंत्र की गरिमा के अनुकूल है और न ही भारत की आत्मा के।

भारतीय संस्कृति का उदाहरण

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपमानजनक भाषा का जवाब गुस्से से नहीं, बल्कि माफी, प्यार और अपनापन दिखाकर भारतीय संस्कृति के शाश्वत मूल्यों, करुणा, सद्भाव और बातचीत का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि मैं युवाओं से अपील करता हूं कि वे गलतफहमियों और ध्यान भटकाने वाली चीजों से ऊपर उठें और अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और संकल्प को राष्ट्र-निर्माण में लगाएं।

मां का महत्व

बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जिन लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी और उनकी दिवंगत मां को अपशब्द कहे, उन्होंने बहुत बड़ा पाप किया है। मां सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि एक भावना है। कुछ नासमझ लोग इस शब्द की असली कीमत भूल जाते हैं।

सामान्य प्रश्न

प्रधानमंत्री मोदी ने किस बात की अपील की?
प्रधानमंत्री मोदी ने जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान अपशब्द कहने वालों को माफ करने की बात कही।
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