संतों के संदेश अपनाने वालों से दूर रहता है पाप
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परसथुआ, एक संवाददाता। संतों और महापुरुषों के सानिध्य में रहने तथा उनके संदेशों को जीवन में उतारने वाले लोगों का अंत:करण इतना शुद्ध और मजबूत हो जाता है कि पाप उनके नजदीक नहीं फटकता। संतों के आशीर्वाद और सद्विचारों को आत्मसात करने से मनुष्य सही मार्ग पर आगे बढ़ता है। यह बातें शनिवार को राधा-कृष्ण मंदिर में संत हरिनारायण दास ने कृष्ण भक्तों को संबोधित करते हुए कहीं। वे विंध्याचल जाने के क्रम में यहां पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण केवल ईश्वर ही नहीं, बल्कि महान साधक और योगेश्वर भी थे। उन्होंने मानव कल्याण के साथ अपने पूरे जीवन में न्याय के लिए प्रयास किया और कभी अन्याय का साथ नहीं दिया।
गीता में भी अच्छे कर्मों के महत्व को स्पष्ट किया गया है। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को प्रकृति के नियमों का पालन करना चाहिए। माता-पिता और गुरु के चरणों की धूल किसी भी तीर्थ स्थल से महान है। यही हमारे सद्ग्रंथों का सार है। मौके पर श्रीराम राय, श्रीकांत यादव, विजय राय, पारसनाथ सिंह, प्रमोद कुमार, अमन कुमार सिंह, शिवजी यादव, संजय यादव, वीरेंद्र सिंह, कुंती कुंवर, ललन सिंह, गोपाल कुमार, जेडी सिंह, अशर्फी देवी, अयोध्या सिंह, विवेक रसिक आदि मौजूद थे।


